देहरादून:
उत्तराखंड सरकार प्रदेश में पर्यावरण अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए एक दूरगामी नीति लागू करने जा रही है। सरकार द्वारा तैयार की गई ‘उत्तराखंड इलेक्ट्रिक वाहन नीति, 2026’ को आगामी कैबिनेट बैठक में मंजूरी मिलने की प्रबल संभावना है।
इस नई नीति के तहत जनता को इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की खरीद पर भारी-भरकम सब्सिडी और रोड टैक्स में छूट दी जाएगी, साथ ही महिला खरीदारों के लिए अतिरिक्त रियायत का प्रावधान भी किया गया है। यह नीति 31 मार्च 2029 तक प्रभावी रह सकती है, जिसका दो साल बाद एक मध्यावधि मूल्यांकन भी किया जाएगा ताकि इसके आर्थिक प्रभावों और व्यावहारिक सुधारों का आकलन किया जा सके।
इस नीति का मुख्य लक्ष्य उत्तराखंड को देश के सबसे अधिक ईवी अनुकूल पर्वतीय राज्य के रूप में स्थापित करना है। इसके मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
इस पॉलिसी के जरिए राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक के लिए कुछ बेहद महत्वपूर्ण लक्ष्य निर्धारित किए हैं:
जनता और निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए नीति में कई वित्तीय रियायतों का प्रस्ताव है:
अपर परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह के अनुसार, पहले इस नीति को केवल परिवहन विभाग तैयार कर रहा था, लेकिन औद्योगिक निवेश को भी बढ़ावा देने के लिए शासन स्तर पर इसे उद्योग विभाग के साथ साझा किया गया। अब दोनों विभागों ने मिलकर एक संयुक्त और सर्वसमावेशी नीति तैयार की है, जिसे वित्त विभाग की समीक्षा के बाद अंतिम रूप दे दिया गया है।
परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा ने नीति पर बात करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर चल रहे ऊर्जा संकट को देखते हुए यह नीति बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ऊर्जा संसाधनों की बचत के लिए लगातार प्रयास कर रही है और सार्वजनिक परिवहन में ईवी बसों के उपयोग पर विशेष जोर दिया जा रहा है। जल्द ही इस व्यापक नीति के प्रस्ताव को मंजूरी के लिए कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे प्रदेश की जनता को पर्यावरण के अनुकूल और किफायती परिवहन का सीधा लाभ मिल सके।
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