बागेश्वर (उत्तराखंड):
देश के सबसे खूबसूरत और चुनौतीपूर्ण ट्रेक रूट्स में शुमार उत्तराखंड के पिंडारी ग्लेशियर ट्रेक पर गए नोएडा के सॉफ्टवेयर इंजीनियर अभिषेक चौहान (28 वर्ष) पिछले पांच दिनों से लापता हैं। लगातार चलाए जा रहे व्यापक सर्च ऑपरेशन के बावजूद अब तक उनका कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है। हालांकि, रेस्क्यू टीम को नदी के पत्थरों के बीच से अभिषेक की शर्ट और टोपी बरामद हुई है, जिससे उनके नदी के तेज बहाव में बहने की आशंका गहरा गई है। इस घटना के बाद से क्षेत्र में ट्रेकर्स की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, गुजरात की एलएंडटी (L&T) कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर कार्यरत अभिषेक चौहान (जिन्हें स्थानीय स्तर पर विशेष चौहान भी कहा जा रहा है) मूल रूप से नोएडा के रहने वाले हैं। वह 28 मई को अपने तीन इंजीनियर दोस्तों और स्थानीय गाइड आनंद राम के साथ खाती गांव से द्वाली की ओर पिंडारी ग्लेशियर ट्रेक पर निकले थे।
29 मई को वापसी के दौरान मलियाधोड़ के पास अभिषेक फोटोग्राफी करने के लिए रुक गए। उन्होंने अपने गाइड/पोर्टर से कहा कि वह काफी थक गए हैं और कुछ देर आराम करने व तस्वीरें लेने के बाद आगे बढ़ेंगे। अभिषेक ने गाइड को आगे जाकर मैगी पॉइंट पर इंतजार करने को कहा। जब काफी देर इंतजार करने के बाद भी अभिषेक वहां नहीं पहुंचे, तो गाइड उन्हें ढूंढते हुए वापस उस स्थान पर गया, लेकिन उनका कोई पता नहीं चला।
रात में खाती गांव पहुंचकर गाइड ने तुरंत वन विभाग की रेंजर डौली डोभाल को घटना की जानकारी दी, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन को सूचित किया गया और खोजबीन शुरू हुई।
लापता इंजीनियर की तलाश के लिए एसडीआरएफ (SDRF), एनडीआरएफ (NDRF), स्थानीय पुलिस, वन विभाग, फायर सर्विस और स्थानीय ग्रामीणों की टीमें जुटी हुई हैं।
कपकोट के थानाध्यक्ष प्रताप सिंह नगरकोटी ने बताया कि मलियाधोड़ के समीप मिले कपड़ों से यह आशंका बढ़ गई है कि अभिषेक नदी के तेज बहाव की चपेट में आ गए होंगे। ग्लेशियर के पास रात का तापमान शून्य से नीचे (माइनस में) चला जाता है, जिससे किसी अनहोनी की आशंका और अधिक बढ़ गई है।
खोज अभियान का दायरा बढ़ाते हुए एनडीआरएफ ने पौड़ी, रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों की स्थानीय टीमों और पुलिस को भी संभावित क्षेत्रों में नजर रखने के लिए सूचना भेजी है।
बागेश्वर के पुलिस उपाधीक्षक अजय शाह ने बताया कि घटना की सूचना 112 के माध्यम से मिलते ही रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया था। अभिषेक के परिजन भी सूचना मिलने के बाद बागेश्वर पहुंच चुके हैं और खोजबीन में सहयोग कर रहे हैं।
इलाका बेहद दुर्गम, पथरीला और घने जंगलों वाला होने के कारण रेस्क्यू टीमों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गहरी खाइयों और जंगलों की निगरानी के लिए आधुनिक ड्रोन कैमरों की मदद ली जा रही है। खराब मौसम के बीच भी टीमें लगातार डटी हुई हैं और जरूरत पड़ने पर अब हवाई सर्वेक्षण के लिए हेलीकॉप्टर की मदद लेने पर भी विचार किया जा रहा है।
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