केदारनाथ में नदी-पहाड़ियों को कूड़ादान समझने वालों पर कसेगा शिकंजा, प्रशासन ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी
खास बातें:
रुद्रप्रयाग. विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम यात्रा के दौरान पवित्र मंदाकिनी नदी में प्लास्टिक कचरा तैरने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। वीडियो सामने आते ही जिला प्रशासन पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यात्रा मार्ग, नदी या पहाड़ियों (खाइयों) में कचरा फेंकने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे लोगों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डीएम की दो टूक: कचरा फेंकने वाले व्यापारियों पर होगी कार्रवाई
जिलाधिकारी (DM) विशाल मिश्रा ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि मंदाकिनी नदी को प्रदूषित करने वाले किसी भी व्यक्ति, व्यापारी या असामाजिक तत्व पर तुरंत एक्शन लिया जाए। यात्रा मार्ग पर नींबू पानी, चाय और अन्य छोटे व्यवसाय करने वाले दुकानदारों को सख्त चेतावनी दी गई है कि वे प्लास्टिक कचरा सिर्फ निर्धारित डस्टबिन में ही डालें। प्रशासन पूरे यात्रा मार्ग पर लगातार निगरानी रख रहा है।
रूट पर 400 सफाई कर्मी और 600 डस्टबिन तैनात
प्रशासन ने स्वच्छता व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए सुलभ इंटरनेशनल के 400 से ज्यादा सफाई कर्मियों (पर्यावरण मित्रों) को सीतापुर से लेकर केदारनाथ धाम तक तैनात किया है। अकेले गौरीकुंड क्षेत्र में 110 सफाई कर्मी काम कर रहे हैं।
जान जोखिम में डालकर खाई से कचरा निकाल रहे सफाई कर्मी
सब कुछ होने के बावजूद कुछ लोग और व्यापारी कचरे को सीधे पहाड़ियों और नदी में फेंक रहे हैं। सुलभ इंटरनेशनल के इंचार्ज धनंजय पाठक ने बताया कि लोगों की इस लापरवाही के कारण सफाई कर्मियों को अपनी जान जोखिम में डालकर गहरी खाइयों और दुर्गम क्षेत्रों में उतरकर सफाई करनी पड़ रही है। उन्होंने अपील की है कि अगर सभी डस्टबिन का इस्तेमाल करें, तो केदारनाथ यात्रा को साफ-सुथरा रखा जा सकता है।
उप जिलाधिकारी (SDM) अनिल रावत ने बताया कि वायरल वीडियो का तुरंत संज्ञान लिया गया है और नोडल अधिकारियों को नदी-नालों में जमा कचरा तुरंत साफ करने के निर्देश दिए गए हैं।
डीएम विशाल मिश्रा ने श्रद्धालुओं, स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों से अपील की है कि बाबा केदार की पावन धरा, हिमालयी पर्यावरण और मंदाकिनी नदी की स्वच्छता केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। जनभागीदारी से ही प्रकृति के इस संतुलन को बचाया जा सकता है।
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