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बहुत मुश्किल से मिलते हैं ये आठ प्रकार के मोती, जानें इनके गुण एवं चमत्कारिक लाभ

नई दिल्ली: ज्योतिष में चंद्रमा को मन का कारक माना जाता है. कर्क राशि के स्वामी चंद्रमा का प्रिय रत्न मोती है. जिसे संस्कृत में ‘मुक्ता’, ‘मुक्ताफल’, ‘शुक्तिज’, ‘मौक्तिक’, ‘शशिरत्न’, ‘इन्द्ररत्न’ आदि कहते हैं. इसे ‘जीवन रत्न’ भी कहा जाता है. जिस तरह चंद्रमा एक सौम्य ग्रह है, कुछ उसी तरह इसका रत्न मोती भी कभी विपरीत फल नहीं देता है. मोती शुभ फल देने वाला, पुत्र, धन और सौभाग्य प्रदान करने वाला रत्न है. मोती मुख्य रूप से आठ प्रकार का पाया जाता है. आइए जानते हैं इसे धारण करने के लाभ जानते हैं.

1. गजमुक्ता

मान्यता है कि गजमुक्ता मोती हाथी के मस्तक से प्राप्त होता है. इसका आकार आँवले के फल के समान तथा शुभ्रवर्ण होता है. इसे सभी मोतियों में श्रेष्ठ माना गया है. मान्यता है कि जिस किसी के पास यह मोती होता है, उसे जीवन में किसी प्रकार की कोई विघ्न या बाधा नहीं आती है.

2. शंखमुक्ता

मान्यता है कि शंखमुक्ता मोती का प्रादुर्भाव समुद्र से उत्पन्न पाञ्चजन्य नामक शंख से होता है. यह ज्वार-भाटे के समय पर अक्सर मिल जाता है. यह अण्डाकार तथा हल्का पीला अथवा नीलावर्ण का होता है. मान्यता है कि यह मोती रोगों से मुक्ति दिलाने वाला होता है.

3. सर्पमुक्ता

मान्यता है कि इस मोती का प्रादुर्भाव श्रेष्ठ वासुकि जाति के सर्प के सिर से होता है. मान्यता यह भी है कि जैस-जैसे सर्प की उम्र बढ़ती है, वैसे-वैसे इस मोती का आकार भी बढ़ता जाता है. यह अत्यंत दुर्लभ और चमत्कारी मोती माना गया है.

4. मीनमुक्ता

मान्यता है कि इस दुर्लभ मोती का प्रादुर्भाव मछली के पेट से माना जाता है. यह चने के आकार का और पीले रंग की आभा लिए कान्तियुक्त होता है. कहते हैं कि यह मोती इतनी आभा लिये होता है कि यदि इसे पानी के भीतर ले जाएं तो पानी में रखी सभी वस्तुएँ इसके प्रभाव के चलते स्पष्ट दिखाई नजर आती हैं.

5. बंशमुक्ता

मान्यता है कि इस मोती का प्रादुर्भाव बांस से होता है, जो कि किसी भाग्यशाली व्यक्ति को ही प्राप्त होता है. स्वाति, पुष्य अथवा श्रवण नक्षत्र से एक दिन पहले बंशमुक्ता की ध्वनि उभरने लगती है. नक्षत्र के समाप्त होने तक यह ध्वनि गूँजती रहती है. जिस भी बाँस में यह मोती होता है, उसमें से निकाल लिया जाता है. इसे धारण करने पर सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है.

6. मेघमुक्ता

इस मोती का प्रादुर्भाव मेघों से होता है. मान्यता है कि रविवार के दिन पुष्य अथवा श्रवण नक्षत्र के समय वर्षा के दौरान इस तरह का मोती गिरता है. इस मोती का कलर बादलों के समान अप्रतिम आभायुक्त होता है. इसे धारण करने पर जीवन में किसी चीज का अभाव नहीं रहता है.

7. शूकरमुक्ता

मान्यता है कि यह मोती वराह श्रेणी के शूकर के यौवनकाल में उसके मस्तिष्क से प्राप्त होता है. शूकरमुक्ता कुछ पीला रंग लिए, गोल आकार आकार का, सुन्दर एवं चमकदार होता है. वाक सिद्धि के लिए शूकरमोती विशेष्ज्ञ रूप से प्रयोग किया जाता है. मान्यता है कि इसे धारण करने पर स्मरणशक्ति में वृद्धि होती है.

8. सीपमोती

सीप से उत्पन्न होने वाला सीममोती भारी मात्रा में पाया जाता है. मुख्य रूप से यह सीपों से कृत्रिम रूप से तैयार किया जाता है. मान्यता है कि स्वाति नक्षत्र में जल की बूंद जब सीप में गिरती है, तो वह बूंद मोती का रूप ले लेती है. इस पर चन्द्रमा का पूर्ण प्रभाव होता है. यह मोती कई आकारों में प्राप्त होता है.

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