नई दिल्ली/देहरादून: उत्तर भारत के जल प्रबंधन और बिजली उत्पादन के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण ‘किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना’ को लेकर वर्षों से चला आ रहा गतिरोध अंततः समाप्त हो गया है। नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में परियोजना से जुड़े सभी छह राज्यों के बीच ऐतिहासिक सहमति बन गई है।
केंद्रीय गृह मंत्री के हस्तक्षेप के बाद हिमाचल प्रदेश सहित अन्य हितधारक राज्य—उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान—इस परियोजना के क्रियान्वयन के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने के लिए राजी हो गए हैं। इस MoU के बाद इस राष्ट्रीय परियोजना को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
किशाऊ बांध परियोजना उत्तराखंड के देहरादून जिले और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की सीमा पर टोंस नदी (यमुना की सबसे बड़ी सहायक नदी) पर प्रस्तावित है।
परियोजना के क्रियान्वयन में सबसे बड़ी बाधा वित्तीय भार को लेकर थी, जिसे सुलझाने के लिए बैठक में एक विशेष फार्मूला तैयार किया गया है:
इस परियोजना से उत्तराखंड को भी वित्तीय मोर्चे पर बड़ी राहत दी गई है। विद्युत घटक के निर्माण के लिए उत्तराखंड को अपने हिस्से के करीब 800 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आश्वासन दिया है कि ‘राज्यों को पूंजी निवेश के लिए विशेष सहायता योजना’ के तहत उत्तराखंड को इस खर्च के लिए केंद्र सरकार की ओर से 50 वर्ष की अवधि के लिए ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। इससे उत्तराखंड को अपने सीमित संसाधनों पर अतिरिक्त भार डाले बिना 220 मेगावाट सस्ती और स्वच्छ बिजली मिल सकेगी, जिससे राज्य को ऊर्जा संकट से निपटने में मदद मिलेगी।
इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ-साथ केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उपस्थित थे। इसके अतिरिक्त केंद्रीय गृह सचिव, केंद्रीय जल शक्ति सचिव, विद्युत मंत्रालय के सचिव, हिमाचल व उत्तराखंड के मुख्य सचिव और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।
सभी बाधाओं के दूर होने के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि दशकों से कागजों पर अटकी यह महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परियोजना जल्द ही धरातल पर उतरेगी।
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