नई दिल्ली: ज्योतिष शास्त्र में 84 रत्नों और उपरत्नों की संख्या बताई गई है, इनमें से एक है माणिक्य। माणिक्य का संबंध ग्रहों के राजा सूर्य देव से है। जिनकी कुंडली में सूर्य की स्थिति कमजोर होती है, उनकी कुंडली में बाकी ग्रह बलवान होते हुए भी शुभ फल नहीं दे पाते। इसलिए सूर्य की स्थिति को मजबूत बनाने के लिए माणिक्य पहनने की सलाह दी जाती है। संस्कृत में माणिक को पद्मराग और रविरत्न, वहीं अंग्रेजी में रूबी स्टोन कहा जाता है
माणिक्य रत्न का संबंध सूर्य देव से माना गया है। इसे धारण करने से व्यक्ति का सूर्य ग्रह मजबूत होता है। साथ ही माणिक्य रत्न की अंगूठी पहनने से व्यक्ति के मान-सम्मान में वृद्धि होती है। कम-से-कम 2-3 कैरेट का माणिक्य रत्न पहनना चाहिए, तभी इसका पूर्ण लाभ मिलता है। इसे सोने या तांबे की अंगूठी में लगवाकर पहनना चाहिए।
सिंह, मेष, वृश्चिक, कर्क और धनु राशि वाले लोगों के लिए माणिक्य धारण करना बहुत ही शुभ माना गया है। माणिक्य पहनने का सर्वोत्तम समय रविवार प्रातः काल होता है। धारण करने के पहले उसे गाय के दूध और गंगाजल से शुद्ध करना चाहिए। माणिक्य रत्न को धारण करने के बाद सूर्य देव के मंदिर में दान पुण्य करने से सर्वाधिक लाभ मिलता है।
माणिक्य कभी भी ज्योतिष की सलाह के बिना नहीं पहनना चाहिए। क्योंकि इससे आपको नुकसान भी हो सकता है। अगर किसी व्यक्ति को माणिक्य सूट नहीं करता तो इससे हृदय रोग, नेत्र रोग और भी अन्य कई रोग आपको घेर सकते हैं। साथ ही यह आपको आर्थिक संकट में भी डाल सकता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों की लग्न मिथुन, मकर, कन्या, तुला और कुंभ है, उन लोगों को माणिक्य रत्न नहीं धारण करना चाहिए।
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