मसूरी। गर्मियों के पर्यटन सीजन में पहाड़ों की रानी मसूरी इस समय पानी की भारी किल्लत से जूझ रही है। मसूरी नगर पालिका टाउन हॉल में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में पेयजल संकट का यह मुद्दा पूरी तरह छाया रहा। पेयजल किल्लत को लेकर स्थानीय जनता और अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।
जनता के गुस्से को देखते हुए कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने जल संस्थान और जल निगम के अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने अधिकारियों को दो टूक चेतावनी देते हुए मसूरी और छावनी (कैंटोनमेंट) क्षेत्र में 48 घंटे के भीतर पानी की आपूर्ति सुचारु करने के निर्देश दिए हैं।
बैठक के दौरान स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और व्यापारिक संगठनों ने ₹144 करोड़ की लागत से तैयार हुई ‘यमुना पंपिंग पेयजल योजना’ के बावजूद पानी की किल्लत पर गहरा आक्रोश जताया। लोगों का कहना था कि जिस योजना को अगले 30 वर्षों तक मसूरी को पानी के संकट से मुक्त करने का दावा कर शुरू किया गया था, उसका लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। स्थिति यह है कि स्थानीय लोगों और होटल व्यवसायियों को अपने खर्च पर निजी पानी के टैंकर मंगवाने पड़ रहे हैं।
पानी को लेकर जनता और जल संस्थान के अधिकारियों के बीच हुई बहस को शांत कराते हुए मंत्री गणेश जोशी ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा:
“अधिकारियों की कार्यशैली के कारण सरकार की छवि खराब हो रही है। सरकार विकास योजनाओं पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, लेकिन यदि उसका लाभ जनता तक नहीं पहुंच रहा, तो इसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी। जनता को परेशान करने वाले किसी भी विभाग की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।”
कैबिनेट मंत्री ने जल निगम को पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध कराने और जल संस्थान को वितरण (डिस्ट्रीब्यूशन) व्यवस्था तत्काल सुधारने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि 48 घंटे के भीतर पानी का संकट दूर कर जनता को राहत दी जाए।
उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि आगामी 10 जून को वह दोबारा सभी विभागों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे। यदि तब तक पेयजल समेत अन्य समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सीधे निलंबन और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में पेयजल के अलावा अन्य बुनियादी समस्याओं पर भी कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए:
मसूरी में लगातार बढ़ रहे ट्रैफिक और अवैध पार्किंग पर भी कैबिनेट मंत्री ने कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए:
इसके अलावा, मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) को ईको पार्क का निर्माण जल्द शुरू करने, पार्किंग की समस्या का स्थायी समाधान ढूंढने और किंक्रेग क्षेत्र में तहसील भवन के निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए।
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