मसूरी/देहरादून। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे से पहले राज्य में सियासी पारा चढ़ गया है। धामी सरकार के कैबिनेट मंत्री और स्थानीय विधायक गणेश जोशी ने राहुल गांधी के दौरे पर तीखा तंज कसा है। गणेश जोशी ने कहा कि राहुल गांधी दरअसल भारतीय जनता पार्टी के सबसे बड़े ‘स्टार प्रचारक’ हैं। उनकी राजनीति का सीधा लाभ हमेशा भाजपा को मिलता है, जबकि उसकी कीमत कांग्रेस को उठानी पड़ती है।
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने मसूरी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि राहुल गांधी जहां भी चुनाव प्रचार या दौरे पर जाते हैं, वहां कांग्रेस को मजबूती मिलने के बजाय भारी राजनीतिक नुकसान होता है।उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “कांग्रेस का जो थोड़ा-बहुत जनाधार बचा हुआ है, उसे पूरी तरह समाप्त करने का काम भी राहुल गांधी ही कर रहे हैं। वे पूर्व में असम, बंगाल और हरियाणा भी गए थे, लेकिन वहां कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा।”
हालांकि, उन्होंने राहुल गांधी के उत्तराखंड आगमन का स्वागत करते हुए कहा कि लोकतंत्र में सभी को जनता के बीच जाने का अधिकार है। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि राहुल गांधी के दौरे से आखिरकार भाजपा को ही राजनीतिक लाभ मिलने वाला है।
आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने एक महत्वपूर्ण घोषणा भी की। उन्होंने स्पष्ट संकेत देते हुए कहा कि वे एक बार फिर मसूरी विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में उतरेंगे।जोशी ने विश्वास जताया कि क्षेत्र में किए गए विकास कार्यों (सड़क, पेयजल, पर्यटन और अन्य बुनियादी सुविधाएं) और जनता के समर्थन के दम पर वे पिछले चुनाव की तुलना में इस बार और अधिक मतों के अंतर से जीत हासिल करेंगे।
कैबिनेट मंत्री के इस तीखे बयान पर कांग्रेस ने भी तत्काल और कड़ा रुख अख्तियार किया है। मसूरी शहर कांग्रेस अध्यक्ष अमित गुप्ता ने मंत्री गणेश जोशी के दावों को खारिज करते हुए इसे उनकी ‘राजनीतिक हताशा’ करार दिया।
अमित गुप्ता ने कहा, “राहुल गांधी एक वैश्विक स्तर के नेता हैं और कैबिनेट मंत्री उनकी बराबरी कभी नहीं कर सकते। उनके दो दिवसीय उत्तराखंड आगमन को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और राज्य की जनता में भारी उत्साह है।”
राहुल गांधी के दौरे और उस पर छिड़ी इस जुबानी जंग के बाद राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां काफी बढ़ गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए दोनों ही प्रमुख दल जमीन पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं। एक तरफ जहां कांग्रेस राहुल गांधी के इस दौरे को संगठनात्मक मजबूती और कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा फूंकने के अवसर के रूप में देख रही है, वहीं भाजपा इसे अपने पक्ष में माहौल बनाने का एक बड़ा मौका मानकर चल रही है।
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