427 ईस्वी में नालंदा यूनिवर्सिटी की स्थापना हुई थी, इसे दुनिया का पहला रिहाइशी विश्वविद्यालय कहा जाता है. जहां एक समय में मध्य पूर्व एशिया के क़रीब 10 हज़ार छात्र एक परिसर में रहते हुए अध्ययन करते थे. उस वक्त वहां की लाइब्रेरी में करीब नब्बे लाख किताबों का संग्रह था. ये छात्र मेडिसिन, तर्कशास्त्र, गणित और बौद्ध सिद्धांतों के बारे में अध्ययन करते थे. तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने एक बार कहा था, “हम लोगों को जो भी बौद्ध ज्ञान मिला, वो सब नालंदा से आया था.”
1190 के दशक में, तुर्क-अफ़गान सैन्य जनरल बख्तियार खिलजी के नेतृत्व में आक्रमणकारियों की सैन्य टुकड़ी ने विश्वविद्यालय को नष्ट कर दिया था. नालंदा यूनिवर्सिटी का परिसर इतना विशाल था कि कहा जाता है कि हमलावरों के आग लगाने के बाद परिसर तीन महीने तक जलता रहा. इन दिनों नज़र आने वाली 23 हेक्टेयर की साइट मूल यूनिवर्सिटी परिसर का एक हिस्सा भर है, लेकिन इस हिस्से में मठों और मंदिरों के अवशेषों को देखकर यह महसूस होता है कि यहां कितना कुछ सीखने को रहा होगा.
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