Dharam Jyotish

प्रलय की आहट और पशुपतिनाथ का रहस्य: जब बागमती में डूब जाएगा शिवलिंग, तब होगा कलियुग का अंत!

काठमांडू (नेपाल):
दुनियाभर के करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र, नेपाल के काठमांडू में स्थित पशुपतिनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि इसे सृष्टि के कालचक्र का रक्षक भी माना जाता है। लेकिन इस भव्य मंदिर के साथ एक ऐसी डरावनी और रहस्यमयी मान्यता जुड़ी है, जो सीधे कलियुग के अंत की ओर इशारा करती है।

पौराणिक शास्त्रों और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, पशुपतिनाथ मंदिर का अस्तित्व और वहां स्थापित शिवलिंग की स्थिति, इस संसार के भविष्य को तय करती है।

बागमती नदी और ‘प्रलय’ का संकेत
पशुपतिनाथ मंदिर के किनारे बहने वाली पवित्र बागमती नदी को लेकर एक चौंकाने वाली भविष्यवाणी प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि मंदिर परिसर में स्थित एक विशेष शिला या शिवलिंग का हिस्सा धीरे-धीरे जमीन में समा रहा है। मान्यता है कि जिस दिन कलियुग अपने चरम (Peak) पर होगा, उस दिन यह शिवलिंग पूरी तरह बागमती नदी के जल में विलीन हो जाएगा। शिवलिंग का पानी में पूरी तरह डूबना, इस युग के अंत और महाप्रलय का संकेत होगा।

अधर्म का बढ़ना और महादेव का प्रस्थान
शास्त्रों के अनुसार, जब समाज से सत्य, दया और नैतिकता का पूरी तरह लोप हो जाएगा और हर तरफ अधर्म का बोलबाला होगा, तब भगवान पशुपतिनाथ इस स्थान का त्याग कर देंगे। माना जाता है कि जब तक महादेव इस मंदिर में विराजमान हैं, तब तक उनकी आध्यात्मिक ऊर्जा कलियुग की नकारात्मक शक्तियों को रोके हुए है। जिस दिन वह यहां से प्रस्थान करेंगे, कलियुग की विनाशकारी शक्तियां पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लेंगी।

क्या कहता है विज्ञान और अध्यात्म?
भले ही आधुनिक विज्ञान इसे भूगर्भीय बदलाव या नदी के जलस्तर से जोड़कर देखे, लेकिन भक्तों के लिए यह गहरी आस्था का विषय है। आध्यात्मिक गुरुओं का मानना है कि पशुपतिनाथ मंदिर एक ‘शक्ति पुंज’ है, जो ब्रह्मांड की ऊर्जा को संतुलित रखता है। मंदिर में होने वाली आरतियां और मंत्रोच्चार कलियुग के प्रभाव को कम करने का काम करते हैं।

एक नए युग की शुरुआत
पशुपतिनाथ से जुड़ी यह मान्यता केवल विनाश की नहीं, बल्कि ‘परिवर्तन’ की भी है। कहा जाता है कि शिवलिंग के डूबने के साथ ही इस कलुषित युग का अंत होगा और एक बार फिर ‘सत्ययुग’ का उदय होगा। यानी पशुपतिनाथ का वह संकेत पुराने के विनाश और नए के सृजन का प्रतीक बनेगा।

फिलहाल, पशुपतिनाथ के दर्शन के लिए उमड़ने वाली भीड़ और वहां की गूंजती घंटियां इस बात का प्रमाण हैं कि महादेव अभी भी अपने भक्तों की रक्षा कर रहे हैं। लेकिन बागमती की लहरों और शिवलिंग के उस रहस्य पर हर किसी की नजर टिकी है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. tv10 india इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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