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इन देशों में रामायण है राष्ट्रीय पुस्तक

नई दिल्ली: रामायण भगवान राम की पुण्य कथा है और भारतीय समाज में इसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह कृति न केवल भारत में बल्कि विश्वभर में धार्मिकता, नैतिकता, और साहित्यिक उत्कृष्टता का प्रतीक है। इसे न केवल धर्मग्रंथ माना जाता है, बल्कि कई देशों में इसे राष्ट्रीय पुस्तक का दर्जा भी प्राप्त है। ये देश कौन-कौन से हैं आइए जानते हैं।

थाइलैंड की राष्ट्रीय पुस्तक है रामायण

थाईलैंड में रामायण को राष्ट्रीय पुस्तक का दर्जा प्राप्त है। थाई भाषा में रामायण को ‘राम-कियेन’ के नाम से जाना जाता है, जिसका अर्थ है ‘राम की कीर्ति’। थाई साहित्य और संस्कृति पर रामायण का गहरा छाप है। यहां तक कि थाई राजा को विष्णु का अवतार माना जाता है और राजा को यहां ‘राम’ भी कहा जाता है। शायद यही वजह है कि भगवान विष्णु का वाहन गरुड़ थाइलैंड का राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न भी है। यह देश बौद्ध धर्म बहुल है, लेकिन इसके बावजूद भी भगवान राम में थाईलैंड के निवासियों की अटूट आस्था है। यहां आज भी राम का गुणगान और उनकी लीलाओं का मंचन किया जाता है।

इंडोनेशिया का राष्ट्रीय काव्य है रामायण

इंडोनेशिया में 90 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है, फिर भी यहां रामायण को राष्ट्रीय काव्य ग्रंथ का दर्जा दिया गया है। इंडोनेशिया में होने वाली रामायण भी विश्व प्रसिद्ध है। यहां दुनिया का पहला देश है जिसने 1973 में अंतरराष्ट्रीय रामायण सम्मेलन का आयोजन किया था। इस देश में रामायण को लेकर दिवानगी भारत से कम नहीं है, यहां भी रामायण का मंचन बड़ी संख्या में किया जाता है। इस देश की एयरलाइंस का लोगो गरुड़ है और यहां की करेंसी नोट पर भगवान गणेश की फोटो होती है।

मलेशिया में रामायण

मलेशिया में भी रामायण बहुत प्रसिद्ध है। यहां रामायण को ‘हिकायत सेरी राम’ के नाम से जाना जाता है। मलेशिया की रामायण की कहानी भारतीय रामायण से बहुत मिलती जुलती है, हालांकि पात्रों के नाम भाषा के अनुसार थोड़े बदल गए हैं।

बर्मा में अनौपचारिक रूप से रामायण है राष्ट्रीय महाकाव्य

भारत के पड़ोसी मुल्क बर्मा, जिसे म्यान्मार और म्यन्मा नाम से भी जाना जाता है, वहां भी रामायण को अनौपचारिक रूप से राष्ट्रीय महाकाव्य माना जाता है। बर्मा में रामायण को ‘यमयान’ के नाम से जाना जाता है। यहां भगवान राम को ‘यम’ और माता सीता को ‘मी थीडा’ पुकारा जाता है।

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