- विश्व हाथी दिवस विशेष: कोटद्वार की मालन नदी से रेस्क्यू की गई थी गंभीर घायल हथिनी, इलाज के बाद अब पूरी तरह स्वस्थ।
- वन मंत्री सुबोध उनियाल ने रखा है नाम ‘मालिनी’, महावत रूपम के साथ बनी अनोखी बॉन्डिंग।
- कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में 1,226 से ज्यादा हाथी और 260 से ज्यादा बाघ मौजूद।

रामनगर (उत्तराखंड) :उत्तराखंड का कॉर्बेट टाइगर रिजर्व सिर्फ बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि हाथियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए भी दुनिया भर में जाना जाता है। इस क्षेत्र में 1,226 से ज्यादा जंगली हाथी और 13 विभागीय (पालतू) हाथी मौजूद हैं।
आज ‘विश्व हाथी दिवस’ के मौके पर कॉर्बेट के कालागढ़ स्थित एलीफेंट सेंटर से एक बेहद भावुक और प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। यह कहानी है नन्ही हथिनी ‘मालिनी’ की, जो कुछ महीने पहले जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही थी, लेकिन आज अपनी मासूम अठखेलियों से हर किसी का दिल जीत रही है।
दर्दनाक हादसा: मालन नदी के तेज बहाव में बहकर झुंड से बिछड़ी थी
पिछले साल कोटद्वार के पास मालन नदी में एक नन्हा हाथी तेज बहाव में बहकर आ गया था। झुंड से बिछड़ी यह नन्ही हथिनी नदी की चट्टानों के बीच फंस गई थी।
स्थानीय लोगों की सूचना पर कॉर्बेट पार्क की टीम मौके पर पहुंची। हथिनी गंभीर रूप से घायल और बेहद कमजोर थी। उसके शरीर पर कई घाव थे। वनकर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित रेस्क्यू किया और इलाज के लिए कालागढ़ एलीफेंट सेंटर लेकर आए।
इलाज से बदली जिंदगी, वन मंत्री ने रखा ‘मालिनी’ नाम
कालागढ़ एलीफेंट सेंटर में वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दुष्यंत शर्मा, वनकर्मियों और महावतों की टीम ने दिन-रात हथिनी की देखभाल की।
लगातार उपचार और बेहतर माहौल मिलने से उसकी हालत में तेजी से सुधार हुआ। कुछ महीने पहले राज्य के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने इस नन्ही हथिनी का नामकरण ‘मालिनी’ किया। आज मालिनी पूरी तरह स्वस्थ है और कैंप में बिना किसी डर के घूमती है।
महावत और मालिनी का रिश्ता: ‘परिवार के बच्चे जैसी देखभाल करता हूं’
कालागढ़ कैंप में मालिनी और उसके महावत रूपम की बॉन्डिंग चर्चा का विषय बनी हुई है। मालिनी पानी के तालाब (एलीफेंट पोंड) में नहाते समय जमकर मस्ती करती है और दिनभर अपने महावत के पीछे-पीछे चलती है।
“जब मालिनी को यहां लाया गया था, उसके शरीर पर गंभीर घाव थे। हालत बहुत खराब थी। आज लगातार इलाज से वह ठीक है। मालिनी मेरे लिए सिर्फ एक जानवर नहीं, परिवार का हिस्सा है। मैं उसकी देखभाल अपने बच्चे की तरह करता हूं।”— रूपम, महावत
अधिकारियों ने कहा- ‘यह वन विभाग की बड़ी उपलब्धि’
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला के अनुसार, मौत के मुंह से किसी वन्यजीव को बचाकर सामान्य जिंदगी देना पूरी टीम के लिए गर्व का विषय है।
“कॉर्बेट में जंगली हाथियों के संरक्षण के साथ-साथ रेस्क्यू किए गए हाथियों के इलाज पर विशेष ध्यान दिया जाता है। गंभीर हालत में लाई गई हथिनी को पूरी तरह स्वस्थ करना वन विभाग की संवेदनशीलता और बड़ी सफलता का उदाहरण है।”— डॉ. साकेत बडोला, निदेशक, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व
वहीं, वन्यजीव प्रेमी गणेश रावत का कहना है कि उत्तराखंड का प्राकृतिक वातावरण हाथियों के अनुकूल है। हाथी केवल वन्यजीव नहीं हैं, वे जंगल के इकोसिस्टम (पारिस्थितिकी तंत्र) को संतुलित रखने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। संकट में फंसी नन्ही हथिनी की यह कहानी इंसान और जानवर के बीच के गहरे रिश्ते की आधुनिक मिसाल है।
कॉर्बेट में हाथियों का कुनबा
- कुल जंगली हाथी: 1,226 से ज्यादा
- विभागीय (पालतू) हाथी: 13
- कुल बाघों की संख्या: 260 से ज्यादा
- रिजर्व का दायरा: कॉर्बेट शिवालिक एलीफेंट रिजर्व का प्रमुख हिस्सा है।
