New Delhi: रावण के वध के बाद रावण के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी विभीषण को दी गयी थी लेकिन सिंहासन सँभालने की जल्दी में विभीषण रावण के शव को वहीं छोड़ गए । जिसके बाद नागकुल के लोग रावण के शव को ले गए, उनको विश्वास था रावण अभी पूरी तरह से नहीं मरा है उसको फिर से जिन्दा किया जा सकता है। लेकिन उनके हर प्रयास असफल रहे और हारकर उन्होंने कई प्रकार के रसायनों का प्रयोग कर रावण के शव को ममी के रूप में रख दिया। कहा जाता है रेगला के घने जंगल में एक विशाल पर्वत है जिसमें एक खतरनाक गुफा स्तिथ है जिसे रावण की गुफा के नाम से जाना जाता है, क्योंकि रावण ने उसी गुफा में वर्षों तपस्या की थी। रेगला की उस गुफा में कोई नही जाता क्योंकि रावण के शव की रक्षा कई खूंखार जानवर और नागकुल के नाग करते है। रावण की ताबूत 18 फ़ीट लंबी और 5 फ़ीट चौड़ी है इतने सालों के बाद भी रावण की ताबूत आज भी रेगला के घने जंगल में सुरक्षित है।
रुद्रप्रयाग/केदारनाथ:विश्व प्रसिद्ध ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग केदारनाथ धाम में हालिया भारी बर्फबारी के बाद पूरी केदार घाटी…
देहरादून: उत्तराखंड की विश्वप्रसिद्ध चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले ही 'प्रवेश नियमों' को लेकर प्रदेश…
देहरादून | देवभूमि उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध चारधामों में प्रवेश को लेकर लिए गए मंदिर समितियों के…
देहरादून: उत्तराखंड में राज्य सरकार के कार्यकाल के चार वर्ष सफलतापूर्वक पूर्ण होने के उपलक्ष्य में…
देहरादून: उत्तराखंड में एक बार फिर मौसम का मिजाज बदलने वाला है। मौसम विज्ञान केंद्र ने…
हरिद्वार। हरिद्वार में 2027 में होने वाले कुंभ मेले की तैयारियों ने रफ्तार पकड़ ली है।…