Dharam Jyotish

तिरुपति बालाजी का अनोखा रहस्य: भगवान की ठोड़ी पर क्यों लगाया जाता है ‘पचाई कपूर’?

बहुत समय पहले की बात है, जब महान संत रामानुजाचार्य ने अपने परम प्रिय शिष्य अनंतलवार को तिरुमला भेजा। उनका काम था भगवान वेंकटेश्वर के लिए एक सुंदर फूलों का बगीचा (नंदनवन) तैयार करना, ताकि उन फूलों से भगवान की नित्य पूजा हो सके।

अनंतलवार अपनी पत्नी के साथ तिरुमला की पहाड़ियों पर रहने लगे। वे भगवान की सेवा में इतने लीन थे कि उन्होंने संकल्प लिया कि बगीचे के निर्माण में वे किसी बाहरी व्यक्ति की मदद नहीं लेंगे, केवल वे और उनकी पत्नी ही यह सेवा करेंगे। उस समय उनकी पत्नी गर्भवती थीं, लेकिन फिर भी वे अपने पति के साथ मिटटी ढोने और खुदाई करने में मदद कर रही थीं।

बालक के रूप में भगवान की लीला
भगवान वेंकटेश्वर से अपने भक्त और उनकी गर्भवती पत्नी का यह कष्ट देखा नहीं गया। भगवान एक छोटे बालक का रूप धारण कर वहां पहुंचे। उन्होंने अनंतलवार की पत्नी के हाथ से टोकरी ले ली और मिटटी फेंकने में उनकी मदद करने लगे।

जब अनंतलवार ने देखा कि एक बालक उनकी पत्नी की मदद कर रहा है, तो वे क्रोधित हो गए। उन्होंने बालक से कहा, “मैं यह सेवा केवल अपने और अपनी पत्नी के परिश्रम से करना चाहता हूँ। तुम यहाँ से चले जाओ।”

लेकिन नटखट बालक नहीं माना। वह बार-बार छिपकर उनकी पत्नी की मदद करता रहा ताकि उन्हें थकान न हो।

अनंतलवार का क्रोध और सब्बल का प्रहार
अनंतलवार को लगा कि यह बालक उनकी तपस्या और सेवा में बाधा डाल रहा है। क्रोध के आवेश में आकर अनंतलवार ने अपने हाथ में रखी लोहे की सब्बल (Crowbar) उस बालक की ओर फेंक मारी।

निशाना चूक गया, लेकिन वह सब्बल बालक की ठोड़ी (Chin) पर जा लगी। चोट लगते ही खून बहने लगा और बालक दर्द से कराहता हुआ मंदिर की ओर भागा और गर्भगृह में अदृश्य हो गया।

सत्य का ज्ञान और पश्चाताप
अनंतलवार उस बालक के पीछे-पीछे मंदिर तक दौड़े। लेकिन वहां कोई बालक नहीं था। जैसे ही उनकी नजर भगवान वेंकटेश्वर की मूर्ति पर पड़ी, वे सन्न रह गए। भगवान की मूर्ति की ठोड़ी से ठीक उसी जगह खून बह रहा था, जहाँ उस बालक को चोट लगी थी।

अनंतलवार समझ गए कि वह कोई साधारण बालक नहीं, बल्कि स्वयं प्रभु थे जो उनकी मदद करने आए थे। आत्मग्लानि और पश्चाताप से भरकर वे फूट-फूट कर रोने लगे। “हे प्रभु! मैंने यह क्या अनर्थ कर दिया! मैंने अपने ही आराध्य को चोट पहुंचा दी।”

पचाई कपूर की शुरुआत
घबराहट में अनंतलवार ने तुरंत कुछ जड़ी-बूटियां लीं और घाव को भरने के लिए वहां ‘पचाई कपूर’ (कच्चा कपूर) लगा दिया। उन्होंने भगवान से बार-बार क्षमा मांगी।

तब भगवान वेंकटेश्वर ने कहा, “हे अनंतलवार! दुखी मत हो। यह चोट मेरे प्रति तुम्हारे समर्पण का प्रमाण है। तुमने अपनी सेवा में किसी और का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया, यह तुम्हारी निष्ठा थी। आज तुमने मेरी ठोड़ी पर जो कपूर लगाया है, वह मुझे बहुत शीतलता प्रदान कर रहा है।”

भगवान ने वरदान दिया कि “आज से मेरी ठोड़ी पर हमेशा यह कपूर लगाया जाएगा ताकि भक्त तुम्हारे इस प्रेम और मेरे इस घाव को हमेशा याद रखें।”

आज भी जीवित है प्रमाण
कहा जाता है कि उसी दिन से तिरुपति बालाजी की ठोड़ी पर चंदन और पचाई कपूर लगाने की परंपरा शुरू हुई।

हैरानी की बात यह है कि जिस लोहे की सब्बल से अनंतलवार ने प्रहार किया था, वह आज भी तिरुपति मंदिर के मुख्य द्वार (महाद्वार) के दाईं ओर लटकी हुई है। यह आने वाले हर भक्त को याद दिलाती है कि भगवान अपने भक्त के हाथ से मिली चोट को भी आभूषण की तरह धारण कर लेते हैं।

Tv10 India

Recent Posts

बदरीनाथ धाम को हाईटेक अस्पताल की सौगात, अक्तूबर में पीएम मोदी कर सकते हैं उद्घाटन

मास्टर प्लान के तहत तैयार हो रहा चार मंजिला सब-जिला अस्पताल, 31 अगस्त तक काम…

10 hours ago

उत्तराखंड: रिवर्स पलायन को गति देने के लिए हर जिले में होंगी प्रवासी पंचायतें, सीएम धामी ने दिए निर्देश

गांव लौटे प्रवासियों के अनुभवों और स्वरोजगार के प्रयासों को साझा करने पर जोर सितंबर…

11 hours ago

सीएम धामी का बड़ा ऐलान: देहरादून के ’13 गांव’ में बनेगा राज्य स्तरीय विपणन केंद्र; स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को मिलेगा बड़ा बाजार

देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित 'मुख्य सेवक सदन' में मुख्यमंत्री उद्यमशाला…

15 hours ago

उत्तराखंड: मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के तहत ‘चौपाल-2026’ का आयोजन; टिहरी और चमोली में प्रचार वाहनों को दिखाई हरी झंडी

टिहरी गढ़वाल :उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने, स्थानीय उत्पादों को…

16 hours ago

हाईकोर्ट शिफ्टिंग विवाद: नैनीताल से हल्द्वानी ट्रांसफर पर सुनवाई पूरी, खंडपीठ ने सुरक्षित रखा फैसला

नैनीताल उत्तराखंड उच्च न्यायालय को नैनीताल से हल्द्वानी के बेल बाबा क्षेत्र में स्थानांतरित करने…

16 hours ago

IIT रुड़की और GB पंत संस्थान की चेतावनी: जलवायु परिवर्तन से कोसी नदी पर गहराया खतरा, तेजी से गिरेगा भूजल

रुड़की :उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाने वाली कोसी नदी बेसिन पर आने…

2 days ago