Dharam Jyotish

Adhik Maas 2026: अधिक मास में क्यों किया जाता है मालपुआ का दान?

अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में 33 मालपुओं का दान करने की परंपरा के पीछे एक बहुत ही गहरा आध्यात्मिक और पौराणिक रहस्य है। इसे केवल एक मिठाई का दान नहीं, बल्कि ‘अपूप दान’ के रूप में देखा जाता है।

यहाँ इसका वास्तविक कारण और महत्व दिया गया है:

1. 33 कोटि देवी-देवताओं का प्रतीक

सनातन धर्म में ’33 कोटि’ (33 प्रकार के) देवी-देवताओं की मान्यता है। अधिक मास के अधिपति स्वयं भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) हैं। शास्त्रों में ऐसी मान्यता है कि यदि आप 33 मालपुओं का दान करते हैं, तो आप प्रत्यक्ष रूप से 33 कोटि देवी-देवताओं को भोग अर्पित कर रहे होते हैं। इस एक दान से उन सभी देवताओं का आशीर्वाद एक साथ प्राप्त हो जाता है।

2. ‘दोष मुक्ति’ का आध्यात्मिक विधान

विद्वानों और कथाओं के अनुसार, 33 की संख्या का विशेष अर्थ है:

  • 30 मालपुए: ये महीने के 30 दिनों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • 31वाँ मालपुआ: यदि अनजाने में आपने अपने गुरु या ब्राह्मण के घर का कुछ खाया हो, तो उसके दोष को दूर करने के लिए।
  • 32वाँ मालपुआ: यदि आपने अपनी बेटी या बहन के घर का अन्न ग्रहण किया हो, तो उस ऋण या दोष से मुक्ति के लिए।
  • 33वाँ मालपुआ: यदि किसी सूतक या अन्य अशुद्ध समय में अनजाने में कुछ ग्रहण कर लिया हो, तो उसके पापों को मिटाने के लिए।

इस प्रकार, 33 मालपुओं का दान मनुष्य को जीवन के विभिन्न अनजाने दोषों और बंधनों से मुक्त करता है।

3. भगवान विष्णु का प्रिय भोग

मालपुआ भगवान विष्णु का अत्यंत प्रिय भोग माना जाता है। अधिक मास भगवान विष्णु का ही महीना है, इसलिए इस दौरान उन्हें मालपुए का भोग लगाकर दान करना उन्हें प्रसन्न करने का सबसे सरल और प्रभावशाली उपाय है।

4. दान की सही विधि (जिसका फल मिलता है)

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दान का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए कुछ नियमों का पालन करना चाहिए:

  • पात्र (बर्तन): मालपुओं को हमेशा कांसे के पात्र में रखकर दान करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
  • निष्काम भाव: यह दान बिना किसी स्वार्थ के (निष्काम भाव से) करना चाहिए।
  • मंत्र: दान करते समय “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करना अत्यंत लाभकारी होता है।
  • विशेष संकेत: दान देते समय मालपुओं के साथ आप अपनी श्रद्धा और आवश्यकतानुसार लौंग, सिक्का या तुलसी पत्र भी रख सकते हैं, जिसे सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

निष्कर्ष:
अधिक मास में 33 मालपुए का दान करना न केवल पितृ दोष और ग्रह दोषों से मुक्ति दिलाता है, बल्कि यह परिवार में सुख, शांति और अखंड सौभाग्य का मार्ग भी प्रशस्त करता है। यह दान एक छोटे से प्रयास में जीवन में बड़ी सकारात्मकता लाने वाला माना गया है।

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