अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में 33 मालपुओं का दान करने की परंपरा के पीछे एक बहुत ही गहरा आध्यात्मिक और पौराणिक रहस्य है। इसे केवल एक मिठाई का दान नहीं, बल्कि ‘अपूप दान’ के रूप में देखा जाता है।
यहाँ इसका वास्तविक कारण और महत्व दिया गया है:
सनातन धर्म में ’33 कोटि’ (33 प्रकार के) देवी-देवताओं की मान्यता है। अधिक मास के अधिपति स्वयं भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) हैं। शास्त्रों में ऐसी मान्यता है कि यदि आप 33 मालपुओं का दान करते हैं, तो आप प्रत्यक्ष रूप से 33 कोटि देवी-देवताओं को भोग अर्पित कर रहे होते हैं। इस एक दान से उन सभी देवताओं का आशीर्वाद एक साथ प्राप्त हो जाता है।
विद्वानों और कथाओं के अनुसार, 33 की संख्या का विशेष अर्थ है:
इस प्रकार, 33 मालपुओं का दान मनुष्य को जीवन के विभिन्न अनजाने दोषों और बंधनों से मुक्त करता है।
मालपुआ भगवान विष्णु का अत्यंत प्रिय भोग माना जाता है। अधिक मास भगवान विष्णु का ही महीना है, इसलिए इस दौरान उन्हें मालपुए का भोग लगाकर दान करना उन्हें प्रसन्न करने का सबसे सरल और प्रभावशाली उपाय है।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दान का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए कुछ नियमों का पालन करना चाहिए:
निष्कर्ष:
अधिक मास में 33 मालपुए का दान करना न केवल पितृ दोष और ग्रह दोषों से मुक्ति दिलाता है, बल्कि यह परिवार में सुख, शांति और अखंड सौभाग्य का मार्ग भी प्रशस्त करता है। यह दान एक छोटे से प्रयास में जीवन में बड़ी सकारात्मकता लाने वाला माना गया है।
मास्टर प्लान के तहत तैयार हो रहा चार मंजिला सब-जिला अस्पताल, 31 अगस्त तक काम…
गांव लौटे प्रवासियों के अनुभवों और स्वरोजगार के प्रयासों को साझा करने पर जोर सितंबर…
देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित 'मुख्य सेवक सदन' में मुख्यमंत्री उद्यमशाला…
टिहरी गढ़वाल :उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने, स्थानीय उत्पादों को…
नैनीताल उत्तराखंड उच्च न्यायालय को नैनीताल से हल्द्वानी के बेल बाबा क्षेत्र में स्थानांतरित करने…
रुड़की :उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाने वाली कोसी नदी बेसिन पर आने…