देहरादून: उत्तराखंड में 12 जून के आसपास मानसून आने की संभावना है, और इस बार सामान्य से लगभग 8% अधिक बारिश होने का अनुमान है. राज्य सरकार भारी बारिश के दौरान राहत और बचाव कार्यों को बेहतर बनाने के साथ-साथ यात्रियों को सटीक मौसम की जानकारी देने पर विशेष जोर दे रही है.
मौसम पूर्वानुमान की चुनौतियाँ और वर्तमान प्रयास:
उत्तराखंड की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण, विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों में आपदा जैसी स्थिति बनती रहती है. मानसून के दौरान सड़कें बाधित होती हैं और जलभराव होता है, जिससे पर्यटकों और यात्रियों को सटीक जानकारी न मिलने के कारण काफी परेशानी होती है, खासकर लंबे जाम में फंसने की वजह से.
वर्तमान में, आपदा प्रबंधन विभाग तीन चरणों में मौसम पूर्वानुमान की जानकारी जारी करता है. बारिश की संभावना होने पर लगभग 3 घंटे पहले SMS के जरिए जानकारी भेजी जाती है. विभाग रोजाना मौसम बुलेटिन जारी करता है और एक हफ्ते के मौसम का रुख भी बताता है. आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन के अनुसार, मौसम विभाग के सहयोग से साझा की जा रही 3 घंटे पहले की सटीक जानकारी की सटीकता लगभग 90% है.
मौसम पूर्वानुमान के लिए बुनियादी ढाँचा:
मौसम की सटीक जानकारी के लिए उत्तराखंड में तीन स्थानों – सुरकंडा देवी, मुक्तेश्वर और लैंसडाउन में डॉप्लर रडार लगाए गए हैं, जिनकी रेंज लगभग 100 किलोमीटर है. इसके अतिरिक्त, 400 से अधिक ऑटोमेटिक वेदर सेंसर स्थापित किए गए हैं, और आपदा प्रबंधन विभाग 500 और सेंसर लगाने की योजना बना रहा है, जिससे अधिक डेटा विश्लेषण कर सटीक जानकारी मिल सके.
मौसम विज्ञान केंद्र की व्याख्या और नए उपाय:
मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. रोहित थपलियाल ने बताया कि हाल के पूर्वानुमान सही साबित हुए हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि 3 घंटे पहले जारी होने वाला ‘नाउ कास्ट’ क्षेत्र-विशिष्ट होता है. अगर किसी जिले में बारिश का पूर्वानुमान है, तो इसका मतलब यह नहीं कि पूरे जिले में बारिश होगी, बल्कि कुछ क्षेत्रों में ही संभावना रहती है. ‘कुछ स्थानों पर बारिश’ का अर्थ 25 से 50% क्षेत्रों में बारिश है, जबकि ‘अनेक स्थानों पर बारिश’ का अर्थ 50 से 75% क्षेत्रों में बारिश हो सकती है.
बड़े अलर्टिंग प्रोग्राम के तहत NDMA द्वारा भेजे जाने वाले थोक मैसेज कई बार देर से (3-6 घंटे बाद) पहुँचते हैं. इस समस्या को दूर करने के लिए भारत सरकार ने ‘सचेत’ ऐप विकसित किया है, जिसके जरिए लोगों को तत्काल अलर्ट मिलते हैं. इसके साथ ही, मौसम की सटीक जानकारी के लिए रडार नेटवर्क और सरफेस ऑब्जर्वेटरी नेटवर्क को भी बढ़ाया जा रहा है.
मौसम पूर्वानुमान जारी करने के 6 तरीके:
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