UTTARAKHAND

ASI का बड़ा अभियान: उत्तराखंड के 4 ऐतिहासिक स्थलों से पानी का रिसाव रोकेगा पुरातत्व विभाग, मंदिर-किले होंगे सुरक्षित

देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड के इतिहास को संजोए रखने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने एक बड़ा मिशन शुरू किया है। राज्य के चार ऐतिहासिक धरोहरों—लाखामंडल मंदिर, महासू देवता मंदिर, चांदपुर गढ़ी और कटारमल सूर्य मंदिर—का संरक्षण किया जा रहा है। इन मंदिरों की छत और शिखरों से हो रहे पानी के रिसाव को रोकने के लिए ASI अब आधुनिक सीमेंट के बजाय पारंपरिक शिल्प और मूल पत्थरों का सहारा लेगा।

क्या है ASI का खास प्लान?

  • मूल स्वरूप की रक्षा: संरक्षण के दौरान सीमेंट, आरसीसी (RCC) या किसी भी कृत्रिम रसायनों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
  • पत्थरों की नंबरिंग: मरम्मत के लिए छत के पत्थरों को एक-एक कर हटाया जाएगा। हर पत्थर पर नंबरिंग की जा रही है, ताकि काम पूरा होने के बाद उसे बिल्कुल उसी जगह दोबारा लगाया जा सके।
  • पारंपरिक मिश्रण: जोड़ मजबूत करने के लिए चूना, गुड़ और बेलगोंद जैसे पारंपरिक मिश्रण (Lime Mortar) का उपयोग किया जाएगा, जैसा कि सदियों पहले मंदिरों के निर्माण में होता था।

इन चार धरोहरों पर रहेगा फोकस

  1. कटारमल सूर्य मंदिर (अल्मोड़ा): 9वीं सदी के इस मंदिर का शिखर पहली बार मरम्मत के लिए खोला जाएगा। यहां सूर्य की पहली किरण सीधे गर्भगृह में पड़ती है।
  2. लाखामंडल मंदिर (देहरादून): महाभारत काल से जुड़ा यह मंदिर अपनी प्राचीन मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है। यहां छत की ‘पत्थर-पठाल’ (स्लेट) संरचना को दुरुस्त किया जाएगा।
  3. महासू देवता मंदिर (हनोल): यह मंदिर 9वीं-10वीं सदी की ‘काठ-कुनी’ (लकड़ी और पत्थर की मिश्रित शैली) का बेहतरीन उदाहरण है।
  4. चांदपुर गढ़ी (गढ़वाल): गढ़वाल की पहली राजधानी का किला और दीवारें समय के साथ झुकने लगी हैं, जिन्हें ‘ड्राई स्टोन मेसनरी’ तकनीक से मजबूत किया जाएगा।

क्यों है यह जरूरी?
ASI के सहायक पुरातत्वविद् मोहन जोशी ने बताया कि इन मंदिरों की छतें वर्षों से कमजोर हो रही थीं, जिससे पानी गर्भगृह तक पहुंच रहा था। इससे न केवल प्राचीन मूर्तियां, बल्कि मंदिरों की नक्काशी भी खराब होने का खतरा था। पानी के रिसाव को रोककर मंदिरों की आयु बढ़ाना ही इस अभियान का मुख्य मकसद है।

सांस्कृतिक विरासत को बचाने की कोशिश
पहाड़ों पर बारिश, बर्फ और मौसम की मार के कारण इन स्मारकों को काफी नुकसान पहुंचा है। ASI का यह काम न केवल मंदिरों को गिरने से बचाएगा, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखेगा।

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