देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड के इतिहास को संजोए रखने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने एक बड़ा मिशन शुरू किया है। राज्य के चार ऐतिहासिक धरोहरों—लाखामंडल मंदिर, महासू देवता मंदिर, चांदपुर गढ़ी और कटारमल सूर्य मंदिर—का संरक्षण किया जा रहा है। इन मंदिरों की छत और शिखरों से हो रहे पानी के रिसाव को रोकने के लिए ASI अब आधुनिक सीमेंट के बजाय पारंपरिक शिल्प और मूल पत्थरों का सहारा लेगा।
क्या है ASI का खास प्लान?
इन चार धरोहरों पर रहेगा फोकस
क्यों है यह जरूरी?
ASI के सहायक पुरातत्वविद् मोहन जोशी ने बताया कि इन मंदिरों की छतें वर्षों से कमजोर हो रही थीं, जिससे पानी गर्भगृह तक पहुंच रहा था। इससे न केवल प्राचीन मूर्तियां, बल्कि मंदिरों की नक्काशी भी खराब होने का खतरा था। पानी के रिसाव को रोककर मंदिरों की आयु बढ़ाना ही इस अभियान का मुख्य मकसद है।
सांस्कृतिक विरासत को बचाने की कोशिश
पहाड़ों पर बारिश, बर्फ और मौसम की मार के कारण इन स्मारकों को काफी नुकसान पहुंचा है। ASI का यह काम न केवल मंदिरों को गिरने से बचाएगा, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखेगा।
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