देहरादून: उत्तराखंड में पर्यटन के नए आयाम स्थापित करने और राज्य के युवाओं को स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है. उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड (UTDB) द्वारा संचालित ‘एस्ट्रो टूर गाइड ट्रेनिंग प्रोग्राम’ के समापन अवसर पर एक विशेष समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें विभाग के अधिकारियों, पर्यटन विशेषज्ञों और बड़ी संख्या में प्रशिक्षुओं ने प्रतिभाग किया.
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड की अतिरिक्त निदेशक पूनम चंद ने कहा कि एस्ट्रो टूर गाइड ट्रेनिंग भारत में अपनी तरह की पहली अनूठी पहल है. उत्तराखंड इस विशिष्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संचालित करने वाला देश का पहला राज्य बन चुका है.
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के सुदूरवर्ती पर्वतीय क्षेत्रों में प्रदूषण मुक्त साफ आसमान और प्राकृतिक परिस्थितियां एस्ट्रो टूरिज्म (खगोल पर्यटन) के लिए बेहद अनुकूल हैं. पर्यटन विकास बोर्ड इस कार्यक्रम को भविष्य के रोजगार के एक बड़े माध्यम के रूप में देख रहा है, जिससे न केवल युवाओं को स्वरोजगार मिलेगा बल्कि पर्यटकों को भी एक बिल्कुल नया और रोमांचक अनुभव प्राप्त होगा. उन्होंने युवाओं से विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर इस उभरते क्षेत्र में उद्यमी के रूप में आगे आने का आह्वान किया.
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में रामनगर, नैनीताल और काशीपुर के करीब 80 वर्तमान और पूर्व प्रशिक्षुओं ने भाग लिया. कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथियों में गवर्नमेंट होटल मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट रामनगर के प्राचार्य डॉ. संजय सिंह, होटल एवं पर्यटन व्यवसायी दीप गुणवंत, प्रसिद्ध नेचर गाइड कुंवर सिंह और दीप मेलकानी शामिल रहे.
प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु:
पर्यटन विभाग के अनुसार, इस अभिनव प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत 3 अक्टूबर 2025 को देहरादून से हुई थी. तब से लेकर अब तक राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में कुल 422 स्थानीय युवाओं को एस्ट्रो टूर गाइड के रूप में सफलतापूर्वक प्रशिक्षित किया जा चुका है. प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके कई युवा अब जमीनी स्तर पर एस्ट्रो टूरिज्म गतिविधियों को शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं.
पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि जिम कॉर्बेट लैंडस्केप, कुमाऊं और गढ़वाल के कई ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्र एस्ट्रो टूरिज्म के लिए वैश्विक स्तर के आदर्श स्थल बन सकते हैं. यदि राज्य में प्रशिक्षित एस्ट्रो गाइडों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार होता है, तो यह न केवल ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देगा बल्कि स्थानीय पहाड़ों की अर्थव्यवस्था को भी आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
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