देहरादून: उत्तराखंड में चारधाम यात्रा 2026 के आगाज से ठीक पहले बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के मुख्य पुजारियों (रावल) को लेकर विवादों ने तूल पकड़ लिया है। एक ओर बदरीनाथ के पूर्व रावल की शादी पर धार्मिक हलकों में बहस छिड़ी है, तो दूसरी ओर केदारनाथ में रावल की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए हैं। इन विवादों के बीच बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) के सीईओ को हटाए जाने के बाद प्रशासनिक चुनौतियां भी बढ़ गई हैं।
बदरीनाथ धाम के पूर्व रावल का विवाह समारोह का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद धर्म के जानकारों और मंदिर समिति के बीच मतभेद सामने आए हैं।
केदारनाथ धाम में रावल की नियुक्ति और उत्तराधिकारी तय करने के मामले में समिति ने सख्त रुख अपना लिया है।
आदि गुरु शंकराचार्य ने सदियों पहले इन धामों में दक्षिण भारतीय ब्राह्मणों को रावल के रूप में स्थापित कर उत्तर और दक्षिण की संस्कृति को जोड़ा था।
19 अप्रैल से गंगोत्री के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा शुरू हो रही है। ठीक इसी समय BKTC के सीईओ विजय थपलियाल की प्रतिनियुक्ति समाप्त कर उन्हें मूल विभाग भेज दिया गया है। ऐसे में यात्रा के प्रबंधन और विवादों के समाधान के लिए एक अनुभवी अधिकारी की नियुक्ति समिति के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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