UTTARAKHAND

उत्तराखंड का ‘क्लीन मॉडल’ अब देश के लिए नजीर: देहरादून, मसूरी समेत 4 शहर बने ‘लाइटहाउस सिटीज’

देहरादून। हिमालयी राज्यों में स्वच्छता की नई इबारत लिखते हुए उत्तराखंड ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राज्य में टिकाऊ और समावेशी शहरी स्वच्छता मॉडल को बढ़ावा देने के लिए देहरादून में ‘उत्तराखंड अर्बन सैनिटेशन कॉन्क्लेव-2026’ का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में प्रदेश के चार शहरों—देहरादून, मसूरी, रुद्रपुर और लालकुआं—को वेस्ट मैनेजमेंट (अपशिष्ट प्रबंधन) में शानदार काम के लिए ‘लाइटहाउस सिटीज’ (मार्गदर्शक शहर) के रूप में पेश किया गया।

हिमालयी राज्यों के लिए ‘रोल मॉडल’
सम्मेलन के दौरान जारी की गई रिपोर्ट ‘लाइटहाउस सिटीज फॉर वेस्ट मैनेजमेंट फ्रॉम उत्तराखंड इंडिया’ को हिमालयी क्षेत्रों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिपोर्ट अन्य हिमालयी राज्यों को कचरा प्रबंधन और स्वच्छता के क्षेत्र में सही राह दिखाएगी।

क्या बोले शहरी विकास मंत्री
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शहरी विकास मंत्री राम सिंह कैड़ा ने कहा कि सरकार उत्तराखंड को स्वच्छता के मामले में देश का सिरमौर बनाने के लिए संकल्पित है। उन्होंने इस दौरान कई महत्वपूर्ण ज्ञान उत्पादों का लोकार्पण किया, जिनमें ‘पर्यावरण मित्र’ ग्राफिक स्टोरी, सेप्टेज प्रबंधन प्रोटोकॉल पर क्षमता निर्माण रिपोर्ट, देहरादून की बस्तियों में समावेशी स्वच्छता पर अध्ययन,
‘टुवर्ड्स सेफ एंड डिग्निफाइड सैनिटेशन वर्क’ शोध रिपोर्ट, यूज्ड वाटर एवं फीकल स्लज मैनेजमेंट डैशबोर्ड, ‘फ्रॉम पॉलिसी टू प्रैक्टिस’ डॉक्यूमेंट्री, क्षमता बढ़ाने पर जोर प्रमुख थे।

शहरी विकास निदेशालय (UDD) के निदेशक विनोद गिरी गोस्वामी ने कहा कि सरकार स्थानीय निकायों को तकनीकी रूप से सक्षम बना रही है। हमारा लक्ष्य है कि सामुदायिक भागीदारी को जोड़कर एक ऐसी स्वच्छता व्यवस्था तैयार की जाए जो लचीली और टिकाऊ हो।
वहीं, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (NIUA) की टीम लीड डॉ. महरीन मट्टो ने कहा कि ‘लाइटहाउस सिटीज’ रिपोर्ट सिर्फ दस्तावेजीकरण नहीं है, बल्कि यह उन नवाचारों का निचोड़ है जो भविष्य में नीति निर्माताओं के लिए मील का पत्थर साबित होंगे।
आयोजन में इनकी रही भागीदारी:
इस कॉन्क्लेव का आयोजन शहरी विकास निदेशालय ने एटीआई नैनीताल और राष्ट्रीय शहरी कार्य संस्थान (NIUA) के सहयोग से किया। सम्मेलन में स्वच्छता के विभिन्न पहलुओं पर मंथन किया गया, ताकि हिमालयी शहरों में कचरा प्रबंधन की समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जा सके।

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