UTTARAKHAND

हरिद्वार में 2 बाघों के शिकार का मामला: जांच के लिए उत्तराखंड आएगी NTCA की टीम; रेंजर को कारण बताओ नोटिस, 3 आरोपी जेल में

खास बातें:

  • घटनास्थल: हरिद्वार वन प्रभाग के श्यामपुर रेंज की सजनपुर बीट में हुआ था दो बाघों का शिकार।
  • कार्रवाई: संबंधित क्षेत्र के रेंजर को कारण बताओ नोटिस जारी, वन विभाग के भीतर हलचल तेज।
  • गिरफ्तारी: मामले में 3 आरोपी गिरफ्तार होकर जेल जा चुके हैं, चौथे की तलाश में छापेमारी जारी।

देहरादून/हरिद्वार. हरिद्वार वन प्रभाग में दो बाघों के शिकार का मामला अब लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। सजनपुर बीट में हुई इस गंभीर वारदात की गूंज अब दिल्ली तक पहुंच गई है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की टीम जल्द ही उत्तराखंड का दौरा करेगी। यह टीम न केवल घटनास्थल का मुआयना करेगी, बल्कि वन विभाग द्वारा अब तक की गई जांच, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और गश्त के रिकॉर्ड की भी समीक्षा करेगी।

रेंजर को कारण बताओ नोटिस, लंबे समय से एक ही जिले में तैनाती पर सवाल

इस मामले में वन विभाग ने कार्रवाई की दिशा बदलते हुए संबंधित रेंज के रेंजर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। आमतौर पर वन्यजीवों के शिकार जैसे मामलों में कार्रवाई केवल वन दरोगा, फॉरेस्ट गार्ड या बीट कर्मचारियों तक ही सीमित रह जाती थी, लेकिन इस बार विभाग जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रहा है।

विभागीय हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि नोटिस पाने वाले रेंजर लंबे समय से हरिद्वार जिले की ही विभिन्न रेंजों (श्यामपुर, रुड़की और खानपुर) में तैनात रहे हैं। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि इतने लंबे समय तक एक ही मैदानी जिले में उनकी तैनाती क्यों बनी रही और उन्हें पर्वतीय क्षेत्रों में क्यों नहीं भेजा गया।

जांच के स्तर पर उठ रहे सवाल

मामले की जांच फिलहाल एसडीओ (SDO) स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि इतने संवेदनशील मामले की जांच प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (PCCF) स्तर के किसी वरिष्ठ अधिकारी की देखरेख में होनी चाहिए थी। एसडीओ स्तर के अधिकारी के लिए अपने से वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही तय करना व्यावहारिक रूप से कठिन माना जाता है।

संगठित शिकार गिरोह की आशंका, 3 आरोपी जेल में

शुरुआती जांच में इस घटना के पीछे किसी संगठित शिकार नेटवर्क का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है। वन विभाग ने इस मामले में अब तक 3 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि एक अन्य आरोपी अभी भी फरार है। फरार आरोपी की तलाश में टीमें विभिन्न संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।

वन मंत्री का बयान:“यह घटना बेहद गंभीर है और सरकार इसे हल्के में नहीं ले रही है। संबंधित रेंजर को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा चुका है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कड़ी कार्रवाई की जाएगी। लापरवाही बरतने वाले किसी भी स्तर के अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।”— सुबोध उनियाल, वन मंत्री, उत्तराखंड

उत्तराखंड में वन्यजीव अपराधों का बढ़ता ग्राफ

राज्य में पिछले कुछ समय में वन्यजीवों से जुड़े अपराधों में बढ़ोतरी देखी गई है। हाथियों की संदिग्ध मौत, सांपों के जहर की तस्करी और अब बाघों के शिकार जैसी घटनाओं ने राज्य की वन सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया नेटवर्क पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, केवल नियमित गश्त के भरोसे रहने के बजाय विभाग को स्थानीय स्तर पर खुफिया तंत्र को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है।

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