हरिद्वार। उत्तराखंड के हरिद्वार वन प्रभाग की श्यामपुर रेंज में दो बाघों को जहर देकर मारने के सनसनीखेज मामले में वन विभाग को बड़ी सफलता मिली है। मामले में दो और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान आशिक (पुत्र गामा) और जुप्पी (पुत्र अल्लू) के रूप में हुई है।
इस मामले में अब तक कुल चार नामजद आरोपियों में से तीन को गिरफ्तार किया जा चुका है। इससे पहले आलम उर्फ फम्मी नाम के मुख्य आरोपी को जेल भेजा जा चुका है, जबकि चौथा आरोपी आमिर हमजा उर्फ मियां अभी फरार है।
सजनपुर बीट में तैनात वनकर्मी जब जंगल में गश्त पर थे, तब उन्हें कुछ वन गुज्जर संदिग्ध हालत में घूमते दिखे। पूछने पर उन्होंने बहाना बनाया कि उनकी भैंस खो गई है और वे उसे ढूंढ रहे हैं। वनकर्मियों को संदेह हुआ क्योंकि उस क्षेत्र में न तो घास थी और न ही कभी भैंसें वहां चरने जाती थीं।
संदेह के आधार पर वन विभाग ने रविवार शाम को सघन सर्च ऑपरेशन चलाया, जिसमें पहले एक बाघ का शव बरामद हुआ। इसके बाद अगले ही दिन (सोमवार) दोपहर को कुछ दूरी पर एक दो साल की मादा बाघिन का शव भी मिल गया।
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में सामने आया कि बाघों ने उनकी एक भैंस का शिकार किया था। इसका बदला लेने के लिए आरोपियों ने मृत भैंस के शरीर पर खेतों में इस्तेमाल होने वाला तीखा कीटनाशक जहर छिड़क दिया। जब बाघ और बाघिन दोबारा उस मांस को खाने आए, तो जहर के असर से उनकी मौत हो गई। आरोपियों ने दोनों मृत बाघों के पैर काट लिए थे और उनके अंगों व खाल की तस्करी करने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन इससे पहले ही वे पकड़े गए।
जिस संवेदनशील क्षेत्र में यह वारदात हुई, वह राजाजी टाइगर रिजर्व की चीला रेंज से सटा हुआ बफर जोन है। इस इलाके में करीब 41 बाघों और सैकड़ों हाथियों की आवाजाही रहती है। इतने संवेदनशील क्षेत्र में हुई इस घटना के बाद वन मंत्री सुबोध उनियाल ने भी घटनास्थल का दौरा किया।
वन मंत्री ने सख्त निर्देश दिए हैं कि यदि विभागीय स्तर पर सुरक्षा में कोई लापरवाही पाई जाती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों को सीधे निलंबित किया जाए। हरिद्वार के डीएफओ (DFO) स्वप्निल अनिरुद्ध ने रेंजर, फॉरेस्टर और फॉरेस्ट गार्ड को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। फरार चल रहे चौथे आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।
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