UTTARAKHAND

उत्तराखंड में साल के जंगलों पर होपलो कीट का साया: संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए 4 हजार और पेड़ों को काटने की तैयारी

  • बड़ा संकट: देहरादून और मसूरी वन प्रभाग में लगभग 33 हजार साल (Sal) के पेड़ों पर होपलो कीट का संक्रमण।
  • पहला चरण: अत्यधिक प्रभावित कैटेगरी-1 और 2 के करीब 19 हजार पेड़ों को काटने के आदेश पहले ही जारी।
  • नया कदम: संक्रमण को स्वस्थ जंगलों में फैलने से रोकने के लिए अब कैटेगरी-3 के पेड़ों को भी हटाने की योजना।
  • प्रक्रिया: राज्य सरकार अंतिम निर्णय के लिए केंद्र सरकार की रीजनल एंपावर्ड कमेटी को भेजेगी विस्तृत प्रस्ताव।

देहरादून। उत्तराखंड के देहरादून वन प्रभाग में बहुमूल्य साल के वृक्षों पर ‘होपलो’ कीट का बढ़ता हमला वन विभाग के लिए बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। जंगलों को इस गंभीर खतरे से बचाने के लिए वन विभाग और मुख्यालय स्तर पर बड़े फैसले लिए जा रहे हैं। पहले चरण में अति-संक्रमित पेड़ों को काटने की प्रक्रिया शुरू करने के बाद, अब विभाग उन पेड़ों पर भी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है जिन्हें अब तक अपेक्षाकृत कम प्रभावित (कैटेगरी-3) श्रेणी में रखा गया था।

वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, देहरादून और मसूरी वन प्रभाग के कुछ क्षेत्रों में अब तक करीब 33 हजार साल के पेड़ों पर होपलो कीट का असर देखा गया है। इनमें से लगभग 19 हजार पेड़ों की स्थिति अत्यधिक खराब हो चुकी है, जिन्हें विशेषज्ञों के अनुसार बचा पाना अब संभव नहीं है। इन्हें कैटेगरी-1 और कैटेगरी-2 में रखा गया है। संक्रमण को स्वस्थ पेड़ों तक फैलने से रोकने के लिए वर्किंग प्लान के प्रावधानों के तहत इन 19 हजार पेड़ों को हटाने के आदेश पहले ही जारी किए जा चुके हैं।

अब खतरा कैटेगरी-3 के पेड़ों पर भी तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। वन विभाग का मानना है कि यदि इन पेड़ों पर समय रहते निर्णय नहीं लिया गया, तो संक्रमण और तेजी से फैलेगा, जिससे बचे हुए स्वस्थ साल के वृक्ष भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।

हाल ही में वन मुख्यालय में हुई वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में प्रभावित क्षेत्रों की रिपोर्ट और वैज्ञानिकों की राय पर चर्चा की गई। बैठक में इस बात पर सहमति बनी है कि कैटेगरी-3 के करीब 4 हजार से अधिक पेड़ों को भी काटने का प्रस्ताव तैयार किया जाए।

चूंकि इन पेड़ों को काटने का अंतिम निर्णय राज्य सरकार अकेले नहीं ले सकती, इसलिए इसके लिए भारत सरकार की रीजनल एंपावर्ड कमेटी (Regional Empowered Committee) की मंजूरी आवश्यक होगी। वन विभाग अब एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर रहा है, जिसमें प्रभावित पेड़ों की संख्या, उनकी वर्तमान स्थिति, संक्रमण के स्तर और संभावित खतरों का पूरा ब्यौरा शामिल किया जाएगा। प्रस्ताव को जल्द ही केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।

वन्यजीव विशेषज्ञों और अधिकारियों के अनुसार, पेड़ों की कटाई का निर्णय अंतिम विकल्प के रूप में लिया जा रहा है। साल के जंगल न केवल मूल्यवान वन संपदा हैं, बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और पर्यावरण संतुलन के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में कुछ संक्रमित पेड़ों को हटाकर बड़े वन क्षेत्र और लाखों स्वस्थ साल के पेड़ों को बचाना ही वर्तमान परिस्थितियों में सबसे व्यावहारिक कदम माना जा रहा है।

Tv10 India

Recent Posts

युवाओं के हाथ में ही देश का भविष्य: ऋतु खंडूरी

युवाओं के हाथ में ही देश का भविष्य: ऋतु खंडूरीदेहरादून में 'राइजिंग लीडर्स' कार्यक्रम की…

2 hours ago

उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन के लिए अनूठी पहल: मानसून और चारधाम यात्रा में रेस्क्यू के लिए 8 हेली कंपनियां देंगी 80 घंटे मुफ्त हवाई सेवा

मुफ्त उड़ान: चारधाम यात्रा में संचालित होने वाली सभी 8 कंपनियां यूकाडा को देंगी 10-10 घंटे…

4 hours ago

उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: सात जिलों को मिले नए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO); स्वास्थ्य सचिव ने जारी किया आदेश

देहरादून। उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, सुदृढ़ और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में स्वास्थ्य…

1 day ago

पौड़ी में दहशत: मुर्गी बाड़े में घुसा गुलदार, 9 मुर्गियों को निवाला बनाने के बाद वन विभाग ने ट्रेंकुलाइज कर पकड़ा

पौड़ी गढ़वाल। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के मासों तल्ला क्षेत्र में बुधवार सुबह उस समय…

1 day ago