UTTARAKHAND

उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन के लिए अनूठी पहल: मानसून और चारधाम यात्रा में रेस्क्यू के लिए 8 हेली कंपनियां देंगी 80 घंटे मुफ्त हवाई सेवा

  • मुफ्त उड़ान: चारधाम यात्रा में संचालित होने वाली सभी 8 कंपनियां यूकाडा को देंगी 10-10 घंटे की निशुल्क हेलीकॉप्टर सेवा।
  • तुरंत एक्शन: दुर्गम क्षेत्रों में मेडिकल इमरजेंसी, एयर रेस्क्यू और राहत अभियानों के लिए उपलब्ध रहेगा यह कोटा।
  • अब तक का असर: चालू सीजन में केदारनाथ सहित अन्य धामों से 100 से अधिक बीमार यात्रियों को किया जा चुका है एयरलिफ्ट।
  • बड़ा फायदा: आपदा के समय बिना किसी अतिरिक्त सरकारी खर्च के प्रशासन को तत्काल मिल सकेगी हवाई सहायता।

देहरादून।
उत्तराखंड में मानसून सीजन और चारधाम यात्रा के दौरान होने वाली संभावित प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब चारधाम यात्रा में संचालित होने वाली हेली सेवाओं का उपयोग केवल श्रद्धालुओं को लाने-ले जाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इन्हें आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों के लिए एक मजबूत ‘कवच’ के रूप में तैयार किया गया है।

इस पहल के तहत यात्रा में सेवाएं दे रहीं सभी 8 हेली कंपनियां यूकाडा को 10-10 घंटे की निशुल्क हवाई सेवा उपलब्ध करा रही हैं। कुल 80 घंटे के इस फ्री फ्लाइंग कोटा का उपयोग आपातकालीन चिकित्सा, एयर रेस्क्यू और राहत अभियानों में किया जा रहा है।

दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में जीवनरेखा बनेगी यह व्यवस्था

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मानसून के समय भूस्खलन, बादल फटने और मार्ग बाधित होने जैसी चुनौतियां आम हैं। ऐसे समय में जब सड़क मार्ग पूरी तरह बंद हो जाते हैं, तब प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाना सबसे कठिन काम होता है।

यूकाडा की इस नई व्यवस्था के बाद, प्रशासन आपदा के समय बिना किसी अतिरिक्त टेंडर या वित्तीय स्वीकृति के तुरंत हेलीकॉप्टरों की सेवाएं ले सकेगा। इससे राहत अभियानों में लगने वाले समय में भारी कमी आएगी।

केदारनाथ धाम और अन्य क्षेत्रों से 100 से ज्यादा यात्रियों की बची जान

प्राधिकरण के अनुसार, अप्रैल माह से शुरू हुई इस व्यवस्था का लाभ अब तक जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। यात्रा के दौरान गंभीर रूप से बीमार होने वाले या ऑक्सीजन की कमी का सामना करने वाले 100 से अधिक श्रद्धालुओं को एयरलिफ्ट कर सुरक्षित स्थानों और अस्पतालों तक पहुंचाया गया है। त्वरित हवाई मदद मिलने से कई गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिल सका और उनकी जान बचाई जा सकी। इसके अलावा, पिछले एक वर्ष में विभिन्न आपदा रेस्क्यू ऑपरेशन्स के जरिए 200 से अधिक लोगों का सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है।


अधिकारियों की बात: सुरक्षा को प्राथमिकता पर रखकर बनाया गया मॉडल

“टेंडर प्रक्रिया के दौरान ही रखी गई थी शर्त”“चारधाम यात्रा के लिए हेली कंपनियों के चयन की टेंडर प्रक्रिया के समय ही प्रत्येक कंपनी से 10 घंटे के निशुल्क फ्लाइंग ऑवर उपलब्ध कराने का अनिवार्य प्रावधान रखा गया था। इसका मुख्य उद्देश्य उच्च हिमालयी क्षेत्रों में फंसे यात्रियों की मदद और राहत कार्यों के लिए बिना समय गंवाए त्वरित हवाई सेवाएं सुनिश्चित करना था। यह व्यवस्था चारधाम आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा को और मजबूत करेगी।”— डॉ. आशीष चौहान, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO), यूकाडा

“मेडिकल इमरजेंसी में मिल रही है बड़ी मदद”“चारधाम यात्रा के दौरान चिकित्सकीय आपात स्थिति का सामना कर रहे श्रद्धालुओं को हेलीकॉप्टर के माध्यम से तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। इस वर्ष केवल केदारनाथ क्षेत्र से ही 100 से अधिक लोगों को इस व्यवस्था के तहत एयर रेस्क्यू की सुविधा दी गई है। मानसून के समय भी यह समन्वित व्यवस्था राहत कार्यों को तेज करने में मददगार साबित होगी।”— अमित शर्मा, हेड ऑफ ऑपरेशन, यूकाडा


क्यों खास है यह व्यवस्था?

पर्वतीय क्षेत्रों में आपदा के समय हेलीकॉप्टर किराए पर लेने की प्रक्रिया और वित्तीय मंजूूरियों में अक्सर बहुमूल्य समय निकल जाता है। यूकाडा और हेली कंपनियों के बीच की इस समन्वित व्यवस्था से आपदा प्रबंधन को ‘फ्री हैंड’ मिला है। विशेषज्ञों के अनुसार, सार्वजनिक हित को ध्यान में रखकर तैयार की गई यह व्यवस्था भविष्य में देश के अन्य आपदा संभावित राज्यों के लिए भी एक बेहतरीन प्रशासनिक मॉडल बन सकती है।

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