UTTARAKHAND

उत्तरकाशी: दयारा बुग्याल से लापता बबीता पांडे का 9 दिन बाद भी सुराग नहीं, अब डोडीताल ट्रेक तक बढ़ाया गया खोज अभियान

  • रामनगर की रहने वाली 24 वर्षीय छात्रा की तलाश में जुटीं कई एजेंसियां; यूकाडा के हेलीकॉप्टर से किया गया दुर्गम जंगलों का हवाई सर्वेक्षण
  • गोई बेस कैंप से रहस्यमयी परिस्थितियों में हुई थीं गायब; चट्टानों, गहरी घाटियों और प्राकृतिक गुफाओं में लगातार सर्च ऑपरेशन जारी

उत्तरकाशी।उत्तरकाशी के प्रसिद्ध दयारा बुग्याल ट्रेक क्षेत्र से रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हुई नैनीताल (रामनगर) निवासी 24 वर्षीय महिला ट्रैकर बबीता पांडे की तलाश लगातार जारी है. घटना के नौवें दिन भी कोई ठोस सुराग हाथ न लगने के कारण अब सर्च ऑपरेशन का दायरा और बढ़ा दिया गया है. रविवार को उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) के हेलीकॉप्टर के माध्यम से दयारा ट्रेक और उसके आसपास के दुर्गम क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया गया. इसके साथ ही जमीनी स्तर पर खोज अभियान को दयारा बुग्याल से आगे बढ़ाकर प्रसिद्ध डोडीताल ट्रेक क्षेत्र तक विस्तारित कर दिया गया है.

अभियान से जुड़े मुख्य बिंदु :

  • लापता ट्रैकर: बबीता पांडे (24 वर्ष, एमबीए छात्रा), रामनगर (नैनीताल) की निवासी.
  • घटनास्थल: दयारा बुग्याल का ‘गोई’ (Goi) बेस कैंप क्षेत्र.
  • खोज का दायरा: दयारा बुग्याल, गोई से लेकर अब डोडीताल ट्रेक और आसपास के घने जंगल.
  • सर्च टीमें: पुलिस, एसडीआरएफ (SDRF), एनडीआरएफ (NDRF), नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM), वन विभाग और स्थानीय राजस्व टीम.

हेलीकॉप्टर और ड्रोन से सघन हवाई सर्वेक्षण

रविवार को खोज अभियान में तेजी लाने के लिए पहली बार हेलीकॉप्टर की मदद ली गई. यूकाडा के हेलीकॉप्टर ने दयारा ट्रेक, गोई बेस कैंप, गहरी खाइयों और आसपास के उन सघन जंगली इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया, जहां पैदल पहुंचना बेहद चुनौतीपूर्ण है. इसके अलावा, सर्च टीमें संवेदनशील और संकरे पहाड़ी रास्तों पर ड्रोन कैमरों और खोजी कुत्तों (Dog Squad) की मदद से भी लगातार छानबीन कर रही हैं.

डोडीताल ट्रेक क्षेत्र की ओर बढ़ा सर्च ऑपरेशन

विशेषज्ञों और स्थानीय जानकारों को अंदेशा है कि बबीता पांडे ट्रेकिंग के दौरान रास्ता भटककर किसी अन्य लिंक मार्ग पर निकल गई होंगी. इसी संभावना को देखते हुए एसडीआरएफ और पुलिस की टीमों ने अब अपना फोकस डोडीताल ट्रेक की ओर स्थानांतरित किया है. जमीनी स्तर पर संयुक्त टीमें दयारा बुग्याल से जुड़ने वाले रास्तों, ऊबड़-खाबड़ चट्टानों, गहरी घाटियों, पहाड़ी गदेरों (नालों) और पत्थरों के बीच बनी प्राकृतिक गुफाओं (उड्यारों) की लगातार सघन तलाशी ले रही हैं.

वरिष्ठ अधिकारी खुद कर रहे हैं निगरानी

इस संवेदनशील रेस्क्यू ऑपरेशन की गंभीरता को देखते हुए उत्तरकाशी के पुलिस अधीक्षक (एसपी) कमलेश उपाध्याय पूरे सर्च अभियान की लगातार समीक्षा कर रहे हैं. वहीं, पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) उत्तरकाशी जनक सिंह पंवार घटना की सूचना मिलने के बाद से ही दयारा ट्रेक और गोई बेस कैंप क्षेत्र में खुद डेरा डाले हुए हैं, ताकि मौके पर खोज अभियान का कुशल समन्वय किया जा सके.

प्रशासन और रेस्क्यू टीमों का प्रयास है कि विपरीत परिस्थितियों और दुर्गम भूगोल के बावजूद जल्द से जल्द लापता ट्रैकर का पता लगाया जा सके.


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