उत्तरकाशी | भगवान गणेश की जन्मस्थली माने जाने वाले प्रसिद्ध ‘डोडीताल’ में सोमवार को मां अन्नपूर्णा मंदिर के कपाट विधि-विधान के साथ खोल दिए गए हैं। अब अगले 6 महीनों तक श्रद्धालु इस पावन धाम में मां अन्नपूर्णा और भगवान गणेश के दर्शन कर सकेंगे। कपाट खुलने के अवसर पर बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने बर्फबारी के बीच भक्ति का आनंद लिया।
अभिजीत मुहूर्त में संपन्न हुई प्रक्रिया
बैशाख माह की कृष्ण चतुर्थी के पावन अवसर पर सोमवार सुबह 11 बजकर 15 मिनट (अभिजीत मुहूर्त) पर मंदिर के कपाट खोले गए। अगोड़ा गांव और अस्सी गंगा घाटी के विभिन्न गांवों से ग्रामीण देव निशानों (डोली) के साथ डोडीताल पहुंचे थे। कपाट खुलने के बाद श्रद्धालुओं ने झील के पास स्थित पार्वती सरोवर में पवित्र स्नान किया और विशेष पूजा-अर्चना की।
चारधाम यात्रा से जुड़ा है गहरा संबंध
मंदिर के पुजारी संतोष खंडूड़ी ने बताया कि यह एक प्राचीन परंपरा है। हर साल चारधाम यात्रा शुरू होने से ठीक 13 दिन पहले डोडीताल के कपाट खोले जाते हैं। हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा अनिवार्य है, इसीलिए चारधाम यात्रा की निर्विघ्न सफलता के लिए उनके जन्मस्थान पर सबसे पहले द्वार खोले जाते हैं और आशीर्वाद लिया जाता है।
बर्फबारी के बीच 15 किलोमीटर का कठिन ट्रेक
श्रद्धालुओं का उत्साह इतना था कि वे करीब 1 फुट तक जमी बर्फ के बीच 15 किलोमीटर की पैदल चढ़ाई कर डोडीताल पहुंचे। रास्ते में कड़ाके की ठंड और दुर्गम रास्तों के बावजूद भक्तों के जयकारों से पूरी घाटी गूंजती रही।
धार्मिक मान्यता: संतान और धन की होती है प्राप्ति
डोडीताल को भगवान गणेश की जन्मभूमि कहा जाता है। मान्यता है कि यहां मां अन्नपूर्णा की साधना करने से भक्तों को धन-संपत्ति और संतान सुख का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यहां एक प्राचीन छोटा मंदिर है, जिसके समीप ही अब एक भव्य मंदिर का निर्माण भी किया गया है।
TV10 INDIA गाइड: कैसे पहुंचे डोडीताल?
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