UTTARAKHAND

उत्तरकाशी में फिर डोली धरती: 2.4 तीव्रता के भूकंप से सहमे लोग

उत्तरकाशी (उत्तराखंड): उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में देर रात भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिससे स्थानीय निवासियों में हड़कंप मच गया। हालांकि, राहत की बात यह है कि भूकंप की तीव्रता कम होने के कारण किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है।

क्या है मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 2.4 मापी गई। इसका केंद्र उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से उत्तर-पूर्व दिशा में मात्र चार किलोमीटर की दूरी पर और जमीन से पांच किलोमीटर की गहराई में स्थित था। देर रात अचानक धरती के कांपने से घरों में सो रहे लोग डर के मारे बाहर निकल आए।

प्रशासन की स्थिति पर नज़र
भूकंप की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग सक्रिय हो गया। जिला आपदा अधिकारी शार्दुल गुसाई ने स्पष्ट किया कि जिले में कहीं से भी किसी अप्रिय घटना या क्षति की खबर नहीं है। प्रशासन ने कहा है कि संबंधित विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। साथ ही, लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और आपात स्थिति में कंट्रोल रूम से संपर्क करने की अपील की गई है।

भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील है उत्तरकाशी
विशेषज्ञों के अनुसार, हिमालयी क्षेत्र में स्थित होने के कारण उत्तरकाशी अत्यंत संवेदनशील ‘भूकंपीय जोन’ में आता है। भूगर्भीय हलचलों के कारण यहाँ अक्सर हल्के झटके महसूस किए जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ये छोटे झटके धरती के भीतर जमा ऊर्जा को बाहर निकालने का काम करते हैं, जो एक तरह से बड़े खतरों को टालने में सहायक होते हैं।

1991 की त्रासदी का खौफ आज भी बरकरार
उत्तरकाशी के लोगों के लिए भूकंप का नाम सुनते ही 20 अक्टूबर 1991 की विनाशकारी यादें ताजा हो जाती हैं। उस दिन आई 6.6 तीव्रता की भीषण आपदा में लगभग 600 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी और हजारों घर मलबे में तब्दील हो गए थे। उस त्रासदी को झेल चुके बुजुर्गों और स्थानीय लोगों के मन में आज भी किसी भी झटके के साथ डर बैठ जाता है, जिसके कारण लोग एहतियातन घरों से बाहर निकल आते हैं।

आंकड़ों पर एक नजर:
जिले में भूकंपीय गतिविधियों का सिलसिला लगातार जारी है। आंकड़ों के अनुसार:

  • वर्ष 2016 में 9 बार।
  • वर्ष 2017 में सर्वाधिक 13 बार।
  • वर्ष 2022 में 5 बार भूकंप के झटके दर्ज किए गए थे।

प्रशासन लगातार लोगों को जागरूक कर रहा है कि भूकंपीय क्षेत्र में होने के कारण घबराने के बजाय सतर्कता बरतें और सुरक्षा उपायों की जानकारी रखें।


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