UTTARAKHAND

उत्तरकाशी का जल संकट: पाइपलाइन है, पर पानी नहीं; बूंद-बूंद को तरसे संग्राली के लोग

उत्तरकाशी: पहाड़ों में बढ़ती गर्मी के साथ ही पेयजल संकट ने विकराल रूप धारण कर लिया है। उत्तरकाशी के कई गांव इस समय सूखे की मार झेल रहे हैं। प्राकृतिक जलस्रोत (नौले-धारे) सूखने के कारण ग्रामीणों को पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। स्थिति इतनी गंभीर है कि भटवाड़ी विकासखंड के संग्राली गांव में पिछले 20 दिनों से पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप है।

करोड़ों की योजना धरी की धरी
ग्रामीणों का आरोप है कि जल निगम द्वारा गजोली से संग्राली तक करोड़ों की लागत से बिछाई गई पेयजल पाइपलाइन अब केवल कागजों तक सीमित रह गई है। स्थानीय निवासी ज्योति प्रसाद नैथानी और जयकिशन भट्ट ने बताया कि यह पेयजल योजना करीब पांच साल पहले बनी थी, लेकिन हर साल पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। विभाग की लापरवाही और लचर निगरानी के कारण गांव के लोग आज भी पानी के लिए पुराने सूखते जलस्रोतों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं।

घंटों पानी ढोने को मजबूर ग्रामीण
गर्मी बढ़ने के साथ ही गांव के परंपरागत जलस्रोत सूखने लगे हैं। इसका सीधा असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है, जिन्हें रोजाना कई किलोमीटर का सफर पैदल तय कर सिर पर पानी ढोना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही जलापूर्ति सुचारू नहीं की गई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होंगे।

क्या कहते हैं अधिकारी?
पेयजल निगम के अधिशासी अभियंता मधुकांत कोटियाल ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा कि पाइपलाइन के क्षतिग्रस्त होने के कारण आपूर्ति बाधित हुई थी। उन्होंने बताया कि पाइपलाइन मरम्मत के लिए भेजी गई थी और वे इस संबंध में संबंधित अधिकारियों से फीडबैक लेकर जल्द से जल्द समस्या के समाधान का प्रयास कर रहे हैं।

प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग
केवल संग्राली गांव ही नहीं, जिले के अन्य हिस्सों में भी बढ़ती आबादी और घटते जलस्तर के कारण संकट गहरा रहा है। हालांकि विभाग टैंकरों के जरिए जलापूर्ति के दावे कर रहा है, लेकिन ग्रामीणों का मानना है कि यह केवल एक अस्थायी उपाय है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पेयजल योजनाओं की नियमित निगरानी की जाए और संकट के स्थायी समाधान हेतु ठोस कदम उठाए जाएं।

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