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Valley of Flowers: पर्यटकों के स्वागत को तैयार फूलों की घाटी; पहले ही दिन देश-विदेश से पहुंचे पर्यटकों ने किया दीदार

चमोली (उत्तराखंड), ।प्रकृति प्रेमियों और ट्रेकर्स के लिए बेहद खूबसूरत और यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल में शामिल ‘फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान’ (Valley of Flowers National Park) के कपाट आज से पर्यटकों के दीदार के लिए खोल दिए गए हैं। समुद्रतल से करीब 12,995 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस घाटी के खुलने से न सिर्फ पर्यटकों में भारी उत्साह है, बल्कि स्थानीय पर्यटन व्यवसाय को भी नई ऊर्जा मिली है। कपाट खुलने के पहले ही दिन 108 देशी-विदेशी पर्यटकों ने घाटी की मनमोहक खूबसूरती का दीदार किया।


खबर के मुख्य बिंदु (Key Highlights):

  • अक्टूबर तक खुला रहेगा पार्क: फूलों की घाटी हर साल की तरह इस बार भी 1 जून से शुरू होकर 31 अक्टूबर तक सैलानियों के लिए खुली रहेगी।
  • पहले दिन उमड़े सैलानी: वन विभाग के अनुसार, रविवार सुबह 8 बजे कपाट खुलने के साथ ही पहले दिन 108 पर्यटकों ने यहां ट्रेकिंग की।
  • 500 से अधिक फूलों की प्रजातियां: घाटी में ब्रह्म कमल, ब्लू पोस्ता (Blue Poppy) और कोबरा लिली जैसी दुर्लभ प्रजातियों सहित 500 से अधिक प्रकार के फूल खिलते हैं।
  • कड़े हैं नियम: सुरक्षा और संरक्षण के लिहाज से घाटी के भीतर सिर्फ दिन के समय ही रुकने की अनुमति है। सूर्यास्त से पहले सभी पर्यटकों को वापस लौटना होता है।

मॉनसून के साथ घाटी में बिछेगी रंग-बिरंगे फूलों की चादर

वन विभाग की रेंजर चेतना कांडपाल ने जानकारी देते हुए बताया कि पर्यटकों के लिए कपाट खोल दिए गए हैं और पहले ही दिन 108 सैलानी घाटी पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में घाटी में फूलों की संख्या थोड़ी कम है, लेकिन जैसे ही मॉनसून की शुरुआत होगी, विभिन्न प्रजातियों के फूल तेजी से खिलने लगेंगे। जुलाई से सितंबर के बीच पूरी घाटी रंग-बिरंगे फूलों की एक प्राकृतिक और सुंदर कालीन के रूप में नजर आने लगती है।

ट्रेक रूट: कैसे पहुंचें फूलों की घाटी?

फूलों की घाटी करीब 87.5 वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में फैली हुई है। यहाँ तक पहुंचने का रास्ता रोमांचक और चुनौतीपूर्ण है:

  1. गोविंदघाट से घांघरिया: पर्यटकों को सबसे पहले गोविंदघाट पहुंचना होता है। यहाँ से करीब 13 किलोमीटर की पैदल चढ़ाई (ट्रेक) करके बेस कैंप ‘घांघरिया’ पहुंचा जाता है।
  2. घांघरिया से मुख्य प्रवेश द्वार: बेस कैंप घांघरिया में रात्रि विश्राम के बाद अगले दिन सुबह फूलों की घाटी का रुख किया जाता है, जो वहां से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता का बेजोड़ खजाना

नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व के अंतर्गत आने वाला यह राष्ट्रीय पार्क केवल फूलों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अद्भुत जैव विविधता के लिए भी जाना जाता है। यहाँ पर्यटकों को दुर्लभ प्रजाति के वन्यजीव, रंग-बिरंगी तितलियाँ और बेशकीमती औषधीय वनस्पतियां देखने को मिलती हैं। इसके साथ ही, रतवान ग्लेशियर से निकलकर घाटी के मध्य से बहने वाली पुष्पावती नदी, प्राकृतिक झरने और दूर-दूर तक फैले ग्लेशियर इसकी सुंदरता को कई गुना बढ़ा देते हैं।

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