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जब महाकवि कालिदास हुए निरुत्तर! 😱

एक बार की बात है, महाकवि कालिदास एक नगर से दूसरे नगर की ओर यात्रा कर रहे थे। दोपहर का समय था, तेज धूप और लंबी यात्रा से वे अत्यंत प्यासे हो गए। तभी मार्ग में उन्हें एक कुआं दिखाई दिया। कुएं पर एक ग्रामीण स्त्री पानी भर रही थी।

कालिदास उसके समीप पहुंचे और विनम्रता से बोले,
“हे मातेश्वरी, मुझे तीव्र प्यास लगी है, कृपया मुझे कुछ जल दीजिए।”

स्त्री ने शांत स्वर में उत्तर दिया,
“क्षमा करें, मैं किसी अजनबी को यूं ही जल नहीं दे सकती। पहले अपना परिचय दीजिए।”

कालिदास को अपने ज्ञान और ख्याति पर गर्व था। उन्होंने अपना नाम न बताते हुए उत्तर दिया,
“मैं एक मेहमान हूं।”

स्त्री मुस्कराई और बोली,
“आप मेहमान नहीं हो सकते। संसार में केवल दो ही सच्चे मेहमान हैं — धन और यौवन। ये दोनों टिकते नहीं, क्षणिक होते हैं।”

कालिदास चकित रह गए। उन्होंने फिर कहा,
“मैं सहनशील हूं।”

स्त्री ने तुरंत उत्तर दिया,
“सहनशील तो केवल दो ही हैं — यह धरती, जो पापियों और पुण्यात्माओं का समान रूप से बोझ उठाती है, और वृक्ष, जो पत्थर खाने पर भी मीठे फल देते हैं।”

कालिदास का गर्व थोड़ा हिलने लगा, फिर भी बोले,
“मैं हठी हूं!”

स्त्री ने गहरी दृष्टि से उन्हें देखते हुए कहा,
“हठ तो केवल दो में है — नाखून और बाल में, जिन्हें चाहे जितनी बार काटो, फिर से उग आते हैं।”

अब कालिदास मौन हो गए। उन्होंने झिझकते हुए कहा,
“तो ठीक है, मैं मूर्ख हूं।”

स्त्री ने गंभीरता से उत्तर दिया,
“मूर्ख भी दो ही होते हैं — वह राजा, जो अयोग्य होते हुए भी सब पर शासन करता है, और वह दरबारी, जो राजा को खुश करने के लिए झूठी प्रशंसा करता है।”

अब कालिदास पूरी तरह निरुत्तर हो चुके थे। उन्हें पहली बार अपने ज्ञान के गर्व पर ग्लानि हुई। वे उस स्त्री के चरणों में गिर पड़े और बोले,
“हे देवी! मुझे क्षमा करें। मुझे अब जल की नहीं, ज्ञान की आवश्यकता है।”

स्त्री मुस्कराई और बोली,
“उठो वत्स!”

कालिदास ने सिर उठाया, तो देखा कि वहां स्वयं देवी सरस्वती प्रकट थीं। उनके तेज से सारा वातावरण आलोकित हो उठा।

देवी सरस्वती ने स्नेहपूर्वक कहा,
“कालिदास! ज्ञान का उद्देश्य विनम्रता है, घमंड नहीं। तूने अपने ज्ञान को अभिमान का वस्त्र बना लिया था, इसलिए तेरा घमंड चूर करने के लिए मुझे यह रूप लेना पड़ा।”

कालिदास की आंखों में पश्चाताप के आंसू छलक आए। उन्होंने करबद्ध होकर देवी से क्षमा मांगी।
देवी प्रसन्न होकर अंतर्ध्यान हो गईं।जब महाकवि कालिदास हुए निरुत्तर! 😱 #short #shorts #trending #saraswatiजब महाकवि कालिदास हुए निरुत्तर! 😱 #short #shorts #trending #saraswatiजब महाकवि कालिदास हुए निरुत्तर! 😱 #short #shorts #trending #saraswati

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