Web Stories

श्रीकृष्ण ने क्यों तोड़ी अपनी प्रिय बांसुरी?

भगवान श्रीकृष्ण और राधा का प्रेम आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक माना जाता है। उनकी प्रेम कहानी वृंदावन की गलियों से शुरू होकर अनंत काल के लिए अमर हो गई। शास्त्रों और लोककथाओं में उनके अलौकिक प्रेम का वर्णन मिलता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि उनके जीवन का अंतिम अध्याय अत्यंत मार्मिक और प्रेम की पराकाष्ठा को दर्शाता है। यह वह क्षण था जब श्रीकृष्ण ने अपनी प्रिय राधा के लिए अंतिम बार बांसुरी बजाई थी। कंस का वध करने के लिए जब श्रीकृष्ण वृंदावन छोड़कर मथुरा गए, तो राधा और उनका विरह हो गया। इसके बाद राधा का विवाह हो गया और उन्होंने अपनी सभी सामाजिक जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाया। वहीं, श्रीकृष्ण ने द्वारका में अपना राज्य बसाया और रुक्मिणी तथा सत्यभामा से विवाह किया। इसके बावजूद, राधा और कृष्ण का आध्यात्मिक संबंध अटूट बना रहा।

श्रीकृष्ण की बांसुरी की धुन ही वह माध्यम थी, जो उन्हें हमेशा एक-दूसरे से जोड़े रखती थी। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब राधा अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में थीं, तो वह अपनी समस्त जिम्मेदारियों से मुक्त होकर आखिरी बार अपने प्रिय कृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचीं। जब कृष्ण ने राधा को देखा तो वे बहुत प्रसन्न हुए। राधा के अनुरोध पर, कृष्ण ने उन्हें महल में एक देविका के रूप में नियुक्त कर दिया। राधा दिन भर महल में रहतीं और जब भी अवसर मिलता, वह दूर से ही कृष्ण के दर्शन कर लेती थीं। हालांकि, महल के ऐश्वर्य में उन्हें कृष्ण के साथ वह आध्यात्मिक जुड़ाव महसूस नहीं हुआ जो वृंदावन में होता था। कुछ समय बाद, राधा ने महल छोड़ दिया और द्वारका के पास एक जंगल में एकांत में रहने लगीं। समय के साथ उनका शरीर कमजोर हो गया।

अपने अंतिम क्षणों में, भगवान श्रीकृष्ण उनके समक्ष प्रकट हुए। कृष्ण ने राधा से उनकी कोई अंतिम इच्छा पूछने को कहा। राधा ने पहले तो मना कर दिया, लेकिन कृष्ण के जोर देने पर उन्होंने कहा कि वह आखिरी बार उन्हें बांसुरी बजाते हुए सुनना चाहती हैं।
श्रीकृष्ण ने अपनी बांसुरी निकाली और एक बहुत ही मधुर धुन बजानी शुरू कर दी। वह दिन-रात बिना रुके बांसुरी बजाते रहे, और उसी दिव्य संगीत को सुनते-सुनते राधा ने श्रीकृष्ण की गोद में ही अपने प्राण त्याग दिए और आध्यात्मिक रूप से कृष्ण में विलीन हो गईं।

अपनी प्रिय राधा के न रहने पर श्रीकृष्ण को गहरा आघात लगा। उनकी बांसुरी की धुन राधा के प्रेम का प्रतीक थी; राधा के बिना उस बांसुरी का कोई अर्थ नहीं था। प्रेम और विरह की उस चरम अवस्था में, श्रीकृष्ण ने अपनी बांसुरी तोड़कर झाड़ियों में फेंक दी और उसके बाद जीवन में फिर कभी कोई वाद्ययंत्र नहीं बजाया। यह उनके अलौकिक प्रेम के प्रतीक के रूप में एक मार्मिक अंत था।

Tv10 India

Recent Posts

खटीमा की बेटी तिला सेन ने फतह किया माउंट एवरेस्ट: ITBP की महिला पर्वतारोही टीम के साथ चोटी पर फहराया तिरंगा

खटीमा (उधम सिंह नगर). उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्र खटीमा की बेटी तिला सेन ने दुनिया की…

5 hours ago

उत्तराखंड पहुंचे निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार: भारत-चीन सीमा पर बसे हर्षिल के पोलिंग बूथ का किया निरीक्षण; मतदाता सूची पुनरीक्षण की समीक्षा की

उत्तरकाशी. भारत निर्वाचन आयोग के निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार शनिवार को उत्तराखंड के सीमांत जनपद उत्तरकाशी…

5 hours ago

हेमकुंड साहिब के कपाट खुले: ‘बोले सो निहाल’ के जयकारों के साथ 3 हजार श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

चमोली. उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध सिख तीर्थस्थल श्री हेमकुंड साहिब के कपाट…

6 hours ago

देश में पेट्रोल-डीजल की किल्लत नहीं: इंडियन ऑयल ने ईंधन संकट की खबरों को नकारा; पिछले 10 दिनों में तीसरी बार बढ़े दाम

नई दिल्ली. देश के कुछ हिस्सों में पेट्रोल और डीजल के संकट की खबरों के बीच…

6 hours ago

हल्द्वानी के टांडा जंगल में सनसनीखेज वारदात: वन विभाग के संविदाकर्मी की कुल्हाड़ी से गर्दन काटकर हत्या; साथी पर शक

हल्द्वानी. नैनीताल जिले के हल्द्वानी अंतर्गत टांडा जंगल क्षेत्र में देर रात एक सनसनीखेज हत्याकांड सामने…

6 hours ago

रुद्रपुर में फर्जीवाड़ा: आयुर्वेदिक दवाओं में एलोपैथी मिलाकर इलाज करने वाला 12वीं पास ‘झोलाछाप’ पकड़ा गया; 1 साल से चला रहा था क्लीनिक

रुद्रपुर/दिनेशपुर. उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के दिनेशपुर थाना क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग और पुलिस…

6 hours ago