जगन्नाथ पुरी का प्रसाद केवल एक भोजन नहीं, बल्कि एक दिव्य अनुभव है। भगवान को अर्पित किए जाने वाले इस प्रसाद की महिमा इतनी है कि इसे ‘महाप्रसाद’ कहा जाता है। इस प्रसाद के तीन प्रमुख रूप हैं — संकुदी प्रसाद, सुखिला प्रसाद, और निर्मला प्रसाद — और हर एक के पीछे छिपी है आस्था, परंपरा और आध्यात्मिक गहराई।
संकुदी प्रसाद सबसे पवित्र और ताजा रूप माना जाता है। इसमें चावल, दाल, सब्ज़ियाँ, खीर और अन्य पकवान शामिल होते हैं। यह प्रसाद केवल मंदिर परिसर के भीतर ही ग्रहण किया जा सकता है — इसे बाहर ले जाने की अनुमति नहीं होती। मान्यता है कि मंदिर के अंदर भगवान की उपस्थिति में बना यह प्रसाद भक्त की आत्मा को शुद्ध करता है। इसे ग्रहण करना केवल पेट भरने का नहीं, बल्कि ईश्वर के साक्षात् स्पर्श को अनुभव करने जैसा होता है।
सुखिला प्रसाद वह प्रसाद है जिसे भक्त अपने साथ घर ले जा सकते हैं। इसमें सूखी मिठाइयाँ जैसे खाजा, गजा, लड्डू, और नमकीन शामिल होते हैं। भक्त इसे अपने प्रियजनों में बाँटते हैं, जिससे भगवान जगन्नाथ की कृपा घर-घर तक पहुँचती है। यह न सिर्फ स्वाद में अनूठा होता है, बल्कि हर टुकड़े में ईश्वर की करुणा और कृपा समाई होती है। यह प्रसाद भक्तों की श्रद्धा को स्थायी स्मृति में बदल देता है।
अब बात करते हैं निर्मला प्रसाद की, जो इन तीनों में सबसे विशेष और रहस्यमयी माना जाता है। यह प्रसाद कोइली बैकुंठ नामक उस पवित्र स्थान पर तैयार किया जाता है जहाँ भगवान जगन्नाथ की पुरानी मूर्तियाँ विधिपूर्वक विसर्जित की जाती हैं। मान्यता है कि यदि कोई व्यक्ति मृत्यु के निकट इस निर्मला प्रसाद को ग्रहण कर ले, तो उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह प्रसाद न केवल शरीर को, बल्कि आत्मा को भी मुक्ति की ओर ले जाता है — जैसे भगवान स्वयं भक्त को जन्म-मरण के बंधन से मुक्त करने आ गए हों।
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