नई दिल्ली/हेल्थ डेस्क: कैंसर आज दुनिया भर में स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन गया है। हर साल लाखों लोग इस घातक बीमारी की चपेट में आते हैं। कैंसर की सबसे डरावनी बात यह है कि कई बार यह शरीर में बिना किसी खास लक्षण के ‘साइलेंट किलर’ की तरह पनपता रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसके शुरुआती संकेतों को समय रहते पहचान लिया जाए, तो इलाज की सफलता की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
आइए जानते हैं शरीर द्वारा दिए जाने वाले वे 9 संकेत, जिन्हें भूलकर भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए:
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, बिना किसी डाइट या एक्सरसाइज के अचानक वजन कम होना कैंसर का एक प्रमुख संकेत हो सकता है। इसे मेडिकल भाषा में ‘कैशेक्सिया’ (Cachexia) कहते हैं। यह अक्सर पेट, अग्न्याशय (Pancreas) या फेफड़ों के कैंसर में देखा जाता है, जहाँ कैंसर कोशिकाएं शरीर की ऊर्जा का तेजी से इस्तेमाल करने लगती हैं।
अक्सर हम दर्द को थकान समझकर टाल देते हैं, लेकिन लंबे समय तक रहने वाला दर्द खतरे की घंटी हो सकता है। उदाहरण के लिए, हड्डियों में लगातार दर्द ‘बोन कैंसर’ का संकेत हो सकता है, जबकि सिर में लगातार रहने वाला दर्द ‘ब्रेन ट्यूमर’ की ओर इशारा कर सकता है।
त्वचा के रंग में बदलाव, नए तिल का निकलना या पुराने तिल के आकार और रंग का अचानक बदलना ‘मेलेनोमा’ (स्किन कैंसर) का लक्षण हो सकता है। अगर त्वचा पर कोई पपड़ी जम रही हो या तिल से खून आ रहा हो, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
शरीर के किसी भी हिस्से से बेवजह खून आना (जैसे खांसी में खून, मल में खून या महिलाओं में असामान्य वैजाइनल ब्लीडिंग) कैंसर का संकेत हो सकता है। यह फेफड़ों, कोलन या गर्भाशय के कैंसर से जुड़ा हो सकता है।
लंबे समय तक कब्ज, डायरिया या मल के आकार में बदलाव कोलन कैंसर का संकेत हो सकता है। वहीं, पेशाब में खून आना या बार-बार पेशाब महसूस होना ब्लैडर या प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण हो सकते हैं।
ऐसी थकान जो भरपूर नींद और आराम के बाद भी ठीक न हो, उसे हल्के में न लें। ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर) जैसे मामलों में शरीर में स्वस्थ रक्त कोशिकाओं की कमी के कारण अत्यधिक कमजोरी और थकान महसूस होती है।
अगर खाना खाते समय गले में कुछ अटकने जैसा महसूस हो या निगलने में दर्द हो, तो यह गले, अन्नप्रणाली (Esophagus) या पेट के कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकता है।
हफ्तों तक रहने वाली खांसी, जो इलाज के बाद भी ठीक न हो, फेफड़ों के कैंसर का लक्षण हो सकती है। इसके अलावा, आवाज का बैठना (Hoarseness) गले या थायरॉयड कैंसर का संकेत हो सकता है।
स्तन (Breast), अंडकोष (Testicles), गर्दन या बगल में कोई भी ऐसी गांठ जो दर्द रहित हो लेकिन धीरे-धीरे बढ़ रही हो, कैंसर की चेतावनी हो सकती है। किसी भी नई गांठ की बायोप्सी या जांच कराना जरूरी है।
कैंसर का इलाज इसकी ‘स्टेज’ पर निर्भर करता है। अगर कैंसर का पता पहली या दूसरी स्टेज में चल जाता है, तो सर्जरी, कीमोथेरेपी या रेडिएशन के जरिए इसके पूरी तरह ठीक होने की संभावना बहुत अधिक होती है। देरी होने पर यह शरीर के अन्य अंगों (मेटास्टेसिस) में फैल सकता है, जिससे इलाज जटिल हो जाता है।
ऊपर बताए गए लक्षणों का मतलब यह जरूरी नहीं कि आपको कैंसर ही है, ये अन्य बीमारियों के भी संकेत हो सकते हैं। हालांकि, सावधानी ही बचाव है। यदि इनमें से कोई भी लक्षण 2-3 हफ्ते से ज्यादा बना रहे, तो तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर (Oncologist) से संपर्क करें और जरूरी टेस्ट (जैसे ब्लड टेस्ट, इमेजिंग स्कैन या बायोप्सी) करवाएं।
याद रखें: आपकी जागरूकता ही इस जानलेवा बीमारी के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है।
(डिस्क्लेमर- यहां दी गई सभी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और सलाह केवल जानकारी के लिए है. यह जानकारी वैज्ञानिक रिसर्च, स्टडीज और मेडिकल और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह पर आधारित है. इन निर्देशों का पालन करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेना सबसे अच्छा है.)
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