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भारत से मानवीय मदद का पहला जत्था म्यांमार पहुंचा, 60-बेड का चिकित्सा केंद्र बनाएगा भारतीय दल

यांगून: भूकंप से तबाह म्यांमार को राहत देने के लिए भारत से आपातकालीन मानवीय सहायता का पहला जत्था शनिवार को यांगून पहुंचा। इस मिशन के तहत भारत ने 15.3 टन राहत सामग्री भेजी है, जिसमें खाद्य सामग्री, चिकित्सा आपूर्ति, स्लीपिंग बैग, सोलर लैंप और रसोई के बर्तन शामिल हैं। भारतीय सेना का विशेष दल यहां भूकंप से प्रभावित इलाकों में पीड़ितों की खोज और बचाव अभियान में मदद करेगा। इसके साथ ही घायलों के इलाज के लिए एक 60-बेड का चिकित्सा उपचार केंद्र भी स्थापित किया जाएगा।

भारतीय दल ने संभाला मोर्चा, घायलों को मिलेगी त्वरित चिकित्सा सेवा

भारत की ओर से भेजी गई 118 सदस्यीय मेडिकल टीम का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कर्नल जगनीत गिल कर रहे हैं। यह दल भारतीय सेना की शत्रुजीत ब्रिगेड मेडिकल रिस्पॉन्डर्स का हिस्सा है, जो आपदा प्रबंधन और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में विशेष रूप से प्रशिक्षित है। भारतीय सेना की एयरबोर्न एंजेल्स टास्क फोर्स भी राहत अभियान में जुटी है, जो प्रभावित क्षेत्रों में प्राथमिक चिकित्सा, सर्जरी और अन्य जरूरी चिकित्सा सेवाएं प्रदान करेगी।

60-बेड का यह चिकित्सा केंद्र स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक बड़ी सहायता साबित होगा। भूकंप के कारण अस्पतालों की सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, जिससे हजारों घायलों के इलाज में कठिनाई हो रही है। भारतीय चिकित्सा दल प्रभावित क्षेत्रों में जाकर भी घायलों का इलाज करेगा।

भारत ने भेजी 15.3 टन राहत सामग्री, अन्य सहायता की तैयारी जारी

भारतीय वायुसेना का एक विशेष विमान 15.3 टन राहत सामग्री लेकर म्यांमार पहुंचा है। इस राहत सामग्री में खाने-पीने की चीजों के अलावा आवश्यक दवाएं और प्राथमिक चिकित्सा किट भी शामिल हैं। इसके अलावा, भारत ने व्यक्तिगत देखभाल सामग्री, किचन सेट और सौर ऊर्जा से चलने वाले लैंप भी भेजे हैं, ताकि प्रभावित लोगों को तत्काल राहत मिल सके।

यांगून स्थित भारतीय दूतावास ने बयान जारी कर कहा कि भारत म्यांमार में प्राकृतिक आपदा पर लगातार नजर रखेगा और जरूरत के अनुसार आगे भी सहायता भेजी जाएगी।

म्यांमार में मची तबाही, 1000 से ज्यादा लोगों की मौत

28 मार्च को आए शक्तिशाली भूकंप ने म्यांमार में भारी तबाही मचाई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस आपदा में कम से कम 1000 लोगों की मौत हो गई है, जबकि हजारों लोग घायल हुए हैं। भूकंप का केंद्र म्यांमार के बागो क्षेत्र में था, जिससे राजधानी नेपी ताव और यांगून समेत कई इलाकों में इमारतें धराशायी हो गईं।

इस विनाशकारी भूकंप के बाद म्यांमार सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मानवीय सहायता की अपील की थी, जिसके जवाब में भारत ने त्वरित राहत अभियान शुरू किया।

चीन की युन्नान बचाव टीम भी पहुंची, 100 मिलियन युआन की सहायता की घोषणा

म्यांमार को मदद भेजने वाले देशों में चीन भी शामिल है। चीनी दूतावास ने बताया कि युन्नान प्रांतीय बचाव और चिकित्सा दल 29 मार्च को यांगून पहुंचा। इस टीम में 37 विशेषज्ञ शामिल हैं, जो लाइफ डिटेक्टर, भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली, पोर्टेबल सैटेलाइट और ड्रोन सहित अत्याधुनिक आपातकालीन उपकरणों से लैस हैं।

इसके अलावा, चीन की सरकार ने म्यांमार के लिए 100 मिलियन युआन (लगभग 1150 करोड़ रुपये) की मानवीय सहायता की घोषणा की है। इस सहायता राशि से टेंट, कंबल, आपातकालीन चिकित्सा किट, भोजन और पानी जैसी आवश्यक चीजें प्रदान की जाएंगी।

चीनी दूतावास ने कहा कि यह सहायता चीन-म्यांमार की मित्रता और मानवीय संवेदना का प्रतीक है। राहत सामग्री का पहला जत्था 31 मार्च को पहुंचने की उम्मीद है, और जरूरत के मुताबिक आगे भी सहायता जारी रहेगी।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग से म्यांमार को राहत मिलने की उम्मीद

भारत और चीन के अलावा, अन्य देशों से भी म्यांमार के लिए मदद पहुंच रही है। म्यांमार की राष्ट्रीय एयरलाइंस Myanmar National Airlines (MNA) ने घोषणा की है कि वह घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में राहत सामग्री और दवाइयों का निःशुल्क परिवहन उपलब्ध कराएगी।

स्थानीय धार्मिक संगठनों और स्वयंसेवी संस्थाओं ने भी राहत कार्यों में योगदान देना शुरू कर दिया है। म्यांमार के कई मंदिर और गुरुद्वारे बेघर लोगों को आश्रय और भोजन मुहैया करा रहे हैं।

भारत का ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के तहत बड़ा कदम

भारत की ओर से म्यांमार को दी जा रही सहायता ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। भारत हमेशा अपने पड़ोसी देशों की आपदा के समय मदद करता आया है। इससे पहले, भारत ने नेपाल (2015 में आए भूकंप) और श्रीलंका (सुनामी के दौरान) को भी बड़े पैमाने पर सहायता प्रदान की थी।

म्यांमार में राहत और बचाव कार्यों के लिए भारत के इस योगदान की व्यापक सराहना हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत और म्यांमार के रिश्तों को और मजबूत करेगा और क्षेत्रीय सहयोग को नई दिशा देगा।

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