चमोली / पीपलकोटी: पीपलकोटी में टीएचडीसी (THDC) की निर्माणाधीन टनल में हुए दर्दनाक हादसे के बाद 444 मेगावाट की ‘विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना’ एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। यह परियोजना अपने शुरुआती दौर से ही भूमि अधिग्रहण, जबरन विस्थापन, पर्यावरणीय अनदेखी और धार्मिक-सांस्कृतिक धरोहरों को नुकसान पहुंचाने को लेकर विवादों में घिरी रही है। स्थानीय ग्रामीणों और पूर्व जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन ने न तो पर्यावरण और सुरक्षा मानकों पर ध्यान दिया और न ही पूर्व में हुए हादसों से कोई सबक सीखा, जिसका खामियाजा आज बेकसूर मजदूरों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ा है।
ग्रामीणों के अनुसार, परियोजना निर्माण के दौरान न तो स्थानीय जनता को विश्वास में लिया गया और न ही संवेदनशील हिमालयी पर्यावरण की परवाह की गई।
परियोजना के खिलाफ जब-जब स्थानीय ग्रामीणों ने अपने हक और पर्यावरण की रक्षा के लिए आवाज उठाई, तब-तब प्रबंधन ने दमनकारी रुख अपनाया।
हाट गांव के पूर्व ग्राम प्रधान राजेंद्र हटवाल और पूर्व ज्येष्ठ उपप्रमुख पंकज हटवाल ने टनल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि टनल हादसे की जांच केवल विभागीय स्तर पर न कराकर किसी स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति (Independent Committee) से कराई जाए। साथ ही परियोजना क्षेत्र में कार्यरत सभी श्रमिकों की सुरक्षा की गारंटी, पर्यावरणीय नियमों की सख्ती से पालना और विस्थापित परिवारों के पुनर्वास व अधिकारों की तुरंत समीक्षा की जाए।
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