- साल 2023 में कारगी चौक के पास 33 केवी हाईटेंशन लाइन की चपेट में आया था रुद्रप्रयाग का चालक
- इलाज के दौरान काटने पड़े थे दोनों हाथ; सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप
- अदालत के आदेश पर पटेल नगर पुलिस ने IPC की धारा 338 के तहत दर्ज किया केस
- मामले की जांच उपनिरीक्षक (SI) विनोद कुमार को सौंपी गई

देहरादून। राजधानी देहरादून के कारगी चौक पर साल 2023 में यूपीसीएल (UPCL) की 33 केवी हाईटेंशन लाइन की चपेट में आकर अपने दोनों हाथ गंवाने वाले वाहन चालक की याचिका पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय के निर्देश पर कोतवाली पटेल नगर पुलिस ने उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPCL) प्रबंधन, प्रबंध निदेशक (MD) और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पीड़ित पिंकू लाल, जो मूल रूप से रुद्रप्रयाग के रहने वाले हैं, ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई थी। शिकायत के अनुसार, 23 अक्टूबर 2023 को वह अपना वाहन लेकर देहरादून के कारगी चौक के पास एक व्यावसायिक प्रतिष्ठान में सामान उतारने पहुँचे थे। जैसे ही वे वाहन से नीचे उतरे, ऊपर से गुजर रही 33 केवी की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गए।
बिजली के जोरदार झटके से वे गंभीर रूप से झुलस गए थे। उन्हें तुरंत देहरादून के स्थानीय अस्पताल और बाद में गंभीर हालत में दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान डॉक्टरों को उनके दोनों हाथ काटने पड़े थे।
पीड़ित का आरोप है कि कारगी चौक पर गुजर रही हाईटेंशन लाइन सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं थी और काफी नीचे लटक रही थी, जिसके कारण यह भयानक हादसा हुआ। पीड़ित ने बताया कि हादसे के बाद लंबे समय तक अस्पताल में इलाज और पुनर्वास के चलते वे तुरंत शिकायत दर्ज नहीं करा सके थे।
स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद उन्होंने पटेल नगर थाने में शिकायत करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। इसके बाद मजबूर होकर उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
पटेल नगर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक विनोद गुसाईं ने बताया कि न्यायालय के आदेशों का अनुपालन करते हुए यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक (MD) और संबंधित विभागीय अधिकारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 338 (दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालकर गंभीर चोट पहुँचाना) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
उन्होंने बताया कि मामले की विवेचना उपनिरीक्षक (SI) विनोद कुमार को सौंपी गई है। जांच के दौरान घटनास्थल पर सुरक्षा मानकों की स्थिति, अधिकारियों की लापरवाही और घटना से जुड़े सभी तकनीकी साक्ष्यों की गहनता से पड़ताल की जाएगी, जिसके आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
