प्रमुख बिंदु:
देहरादून: उत्तराखंड की चारधाम यात्रा में केदारनाथ और बदरीनाथ दोनों धामों का विशेष महत्व है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बदरीनाथ धाम परिसर में ही एक ऐसा मंदिर मौजूद है, जिसके दर्शन के बिना यात्रा अधूरी मानी जाती है? मान्यता है कि इस मंदिर में पूजा करने से भक्तों को बाबा केदारनाथ के दर्शन के समान ही पुण्य और आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह मंदिर है— भगवान आदि केदारेश्वर का मंदिर।
बदरीनाथ में मौजूद है भगवान शिव का यह रूप
बदरीनाथ धाम मुख्य रूप से भगवान विष्णु (बदरी विशाल) को समर्पित है, लेकिन मंदिर परिसर में ही भगवान शिव ‘आदि केदारेश्वर’ के रूप में विराजमान हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, बदरीनाथ की यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आदि केदारेश्वर के दर्शन करना अनिवार्य माना गया है।
क्यों खास है यह मंदिर?
धर्मशास्त्रों और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त दुर्गम रास्तों या स्वास्थ्य कारणों से केदारनाथ धाम नहीं जा पाते, यदि वे पूरी श्रद्धा के साथ बदरीनाथ स्थित आदि केदारेश्वर मंदिर में माथा टेकते हैं, तो उन्हें केदारनाथ धाम की यात्रा जैसा ही फल प्राप्त होता है। इसे ‘हरि’ (विष्णु) और ‘हर’ (शिव) के मिलन का प्रतीक भी माना जाता है।
धार्मिक महत्व
स्कंद पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में भी इस बात का उल्लेख मिलता है कि बदरीनाथ धाम में भगवान विष्णु के दर्शन से पहले या बाद में भगवान शिव (आदि केदारेश्वर) की पूजा करने से मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। यही कारण है कि पंच पूजा के दौरान भी इस मंदिर का विशेष महत्व होता है।
जब बद्रीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद होते हैं, तो उससे पहले पांच दिनों तक पंचपूजा होती है, जिसमें पहले दिन भगवान गणेश का मंदिर बंद होता है. दूसरे दिन आदिकेदार के कपाट बंद कर दिए जाते हैं.
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