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मणिपुर में ‘राष्ट्रपति शासन’ की गूंज-क्या बदलेगा राज्य का भविष्य?

मणिपुर में लगा राष्ट्रपति शासन।

केंद्र सरकार ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया है। गृह मंत्रालय ने इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। राज्य में लंबे समय से जारी अशांति और संवैधानिक संकट के कारण यह निर्णय लिया गया। बीते रविवार को मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद यह कदम उठाया गया। उन्होंने अपना इस्तीफा राज्यपाल अजय कुमार भल्ला को सौंपा था।

गृह मंत्रालय की अधिसूचना में क्या कहा गया?

गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है— “भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को मणिपुर के राज्यपाल से एक रिपोर्ट प्राप्त हुई है। रिपोर्ट और अन्य सूचनाओं पर विचार करने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि राज्य की सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार सुचारू रूप से नहीं चल सकती। इसलिए, मैं संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए मणिपुर राज्य की सभी प्रशासनिक शक्तियों को अपने अधीन लेती हूं।”

अनुच्छेद 356: राष्ट्रपति शासन की संवैधानिक प्रक्रिया

मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने 10 फरवरी से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र को अमान्य घोषित कर दिया था। इससे पहले, राज्य विधानसभा का अंतिम सत्र 12 अगस्त 2024 को संपन्न हुआ था। संवैधानिक गतिरोध की स्थिति में अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लागू करने का ही एकमात्र विकल्प बचा था।

संविधान के अनुच्छेद 356 के अनुसार, यदि किसी राज्य की सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार कार्य नहीं कर पा रही हो, तो राष्ट्रपति को यह अधिकार है कि वह केंद्रीय मंत्रिपरिषद की सलाह पर राज्य का प्रशासन अपने हाथ में ले सकती हैं।

क्या राष्ट्रपति शासन स्थायी है?

भारतीय जनता पार्टी के मणिपुर प्रभारी संबित पात्रा ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘सस्पेंडेड एनीमेशन’ की स्थिति बताया। इसका अर्थ यह है कि राज्य में फिर से सरकार बहाल की जा सकती है, और मुख्यमंत्री नियुक्त किया जा सकता है।

हिंसा और अशांति: मणिपुर का संवेदनशील माहौल

मई 2023 से राज्य में जातीय हिंसा जारी है। इंफाल घाटी में रहने वाले मेइती समुदाय और पहाड़ी क्षेत्रों में बसने वाले कुकी-जो समुदाय के बीच संघर्ष के कारण 250 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि हजारों लोग बेघर हो गए हैं। राज्य में शांति बनाए रखने के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है।

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन का यह नया अध्याय राज्य की राजनीतिक स्थिरता और प्रशासनिक स्थिति पर क्या प्रभाव डालेगा, यह देखने वाली बात होगी।

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