UTTARAKHAND

उत्तराखंड के ‘भगत दा’ को आज मिलेगा पद्म भूषण; राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु करेंगी सम्मानित, जानें शिक्षक से पूर्व सीएम और राज्यपाल बनने तक का सफर

पूर्व मुख्यमंत्री व महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी

खास बातें:

  • गर्व का क्षण: देश के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘पद्म भूषण’ से पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी आज (25 मई) राष्ट्रपति भवन में सम्मानित होंगे।
  • संघर्ष से सफलता: बागेश्वर के पलानधुरा गांव में जन्मे कोश्यारी ने विपरीत परिस्थितियों में शिक्षा पाई और अल्मोड़ा कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में एमए (MA) की डिग्री हासिल की।
  • शिक्षा की अलख: अपने करियर की शुरुआत बतौर शिक्षक करने वाले कोश्यारी ने 1966 में पिथौरागढ़ में पहले सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना कर सीमांत क्षेत्र में शिक्षा को मजबूत किया।
  • शानदार राजनीतिक सफर: उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य से लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री, लोकसभा-राज्यसभा सांसद और महाराष्ट्र-गोवा के राज्यपाल के महत्वपूर्ण पदों को संभाला।

देहरादून। उत्तराखंड के लिए आज (25 मई) का दिन बेहद खास और ऐतिहासिक गर्व लेकर आया है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, जिन्हें लोग आदर और प्यार से ‘भगत दा’ कहते हैं, आज नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले भव्य समारोह में ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किए जाएंगे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु उन्हें राष्ट्र निर्माण, शिक्षा और सार्वजनिक सेवा में उनके अमूल्य व असाधारण योगदान के लिए यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान करेंगी।

पलानधुरा गांव से पद्म भूषण तक का सफर

17 जून, 1942 को उत्तराखंड के सीमावर्ती जिले बागेश्वर के पलानधुरा गांव में जन्मे भगत सिंह कोश्यारी की शुरुआती परवरिश बेहद सामान्य ग्रामीण परिवेश में हुई। विषम परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी शिक्षा से समझौता नहीं किया। अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 1964 में आगरा विश्वविद्यालय से संबद्ध अल्मोड़ा कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर (एमए) की उपाधि पूरी की।

शिक्षक बनकर जगाई अलख, सीमांत क्षेत्र में खोले स्कूल

अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने समाज सेवा और शिक्षा को अपना माध्यम बनाया:

  • उन्होंने उत्तर प्रदेश के कासगंज स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में पढ़ाना शुरू किया, जहां बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से अवगत कराया।
  • इसके बाद, वर्ष 1966 में उन्होंने उत्तराखंड के सुदूर और सीमांत जिले पिथौरागढ़ में पहले सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना की। इससे दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों के लिए शिक्षा की राह आसान हुई।

सक्रिय राजनीति और महत्वपूर्ण पदों का सफर

एक समर्पित सामाजिक और राष्ट्रवादी कार्यकर्ता के रूप में काम करते हुए भगत सिंह कोश्यारी का राजनीतिक सफर भी बेहद सक्रिय और प्रभावशाली रहा:

  • 1997: उत्तर प्रदेश विधान परिषद के लिए मनोनीत सदस्य के रूप में संसदीय सफर की शुरुआत की।
  • 2000 (उत्तराखंड गठन): नवंबर 2000 में अलग उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद वे अंतरिम सरकार के पहले मंत्रिमंडल में वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री बने और बाद में राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में बागडोर संभाली।
  • 2008: प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए वे राज्यसभा के सदस्य चुने गए।
  • 2014: राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखते हुए उन्होंने नैनीताल-ऊधमसिंह नगर लोकसभा क्षेत्र से भारी मतों से विजय प्राप्त की।
  • 2019: प्रशासनिक और राजनीतिक दक्षता को देखते हुए 5 सितंबर 2019 को उन्हें महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया गया।
  • 2020: राज्यपाल के रूप में अपनी कुशल कार्यशैली के दौरान उन्हें अगस्त 2020 में गोवा के राज्यपाल पद का अतिरिक्त कार्यभार भी सौंपा गया था।

पब्लिक अफेयर्स (सार्वजनिक मामलों) के क्षेत्र में उनके इसी दीर्घकालिक और निस्वार्थ योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें देश के इस शीर्ष नागरिक सम्मान के लिए चुना है। इस उपलब्धि पर पूरे उत्तराखंड और विशेष रूप से उनके गृह जनपद बागेश्वर में हर्ष का माहौल है।

Tv10 India

Recent Posts

उत्तराखंड में भारी बारिश से तबाही: भूस्खलन के कारण बदरीनाथ और गंगोत्री मार्ग बंद, मैदानी इलाकों में बाढ़ जैसे हालात

देहरादून: उत्तराखंड में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश का कहर अब पहाड़ से लेकर मैदानी…

3 hours ago

उत्तराखंड में भारी बारिश का रेड अलर्ट, कई जिलों में कल स्कूल रहेंगे बंद

देहरादून: भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), देहरादून द्वारा जारी ताज़ा मौसम पूर्वानुमान के अनुसार आज…

3 hours ago

बदरीनाथ धाम चढ़ावा चोरी मामला: CM धामी बोले- ‘धार्मिक स्थलों पर राजनीति से कम होता है उनका वैभव, गड़बड़ी करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई’

देहरादून: उत्तराखंड के प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और अनियमितताओं के मामले…

4 hours ago

बिना पासपोर्ट-वीजा भारत से ही करें कैलाश पर्वत के दर्शन: ओल्ड लिपुलेख व्यू प्वाइंट के लिए अभी 2 महीने का इंतजार; मानसून के बाद शुरू होंगे परमिट

पिथौरागढ़ श्रद्धालुओं और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक बेहद रोमांचक और आध्यात्मिक खबर है। अब…

5 hours ago

वन्यजीव संरक्षण के साथ विकास: 743 करोड़ से बनेगा 20 किमी लंबा भानियावाला-ऋषिकेश हाईवे, हाथियों के लिए बनेंगे 5 अंडरपास और 3.5 किमी का एलिवेटेड मार्ग

देहरादून,: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) उत्तराखंड में भानियावाला-जॉलीग्रांट-ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना (NH-07) को गति…

1 day ago