नई दिल्ली: जिस दिन कालदेव को अयोध्या में प्रवेश करने का समय था, उसी दिन भगवान राम ने हनुमान को मुख्य द्वार से दूर रखने के लिए अपनी अंगूठी को महल के फर्श की दरार में छिपा दिया। उन्होंने हनुमान जी से कहा कि वे उस अंगूठी को निकालें, लेकिन हनुमान जी ने छोटे आकार में परिवर्तित होकर दरार में प्रवेश किया। वे जल्दी ही पता चला कि यह दरार वास्तव में एक सुरंग है, जो नागलोक की ओर जाती है।
नागलोक पहुंचने पर, हनुमान जी ने नागों के राजा वासुकी से मुलाकात की। जब वासुकी ने उनके आने का कारण पूछा, तो हनुमान जी ने पूरी घटना का विवरण दिया। वासुकी ने उन्हें नागलोक के मध्य ले जाकर एक ढेर अंगूठियों का परिचय कराया और कहा कि वहां उन्हें उनकी अंगूठी मिल जाएगी।
हनुमान जी ने अंगूठियों का ढेर देखकर चिंता महसूस की, लेकिन जब उन्होंने पहली अंगूठी उठाई, तो वह भगवान राम की थी। उन्होंने आश्चर्य महसूस किया कि जब उन्होंने दूसरी अंगूठी उठाई, तो उस पर भी भगवान राम का नाम लिखा हुआ था। उन्होंने देखा कि ढेर की सभी अंगूठियों पर भगवान राम का नाम लिखा हुआ था। इसे देखकर हनुमान जी ने समझ लिया कि उनके साथ जानबूझकर खिलवाड़ किया गया है।
हनुमान जी को उदास देखकर, वासुकी ने मुस्कान भरे स्वर में कहा, “महावीर, पृथ्वी लोक में जो भी आता है, उसे एक दिन वापस लौटना ही पड़ता है।”
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