
मुख्य बिंदु:
- पहले जत्थे में 49 श्रद्धालु: इस दल में देश के विभिन्न राज्यों के 34 पुरुष और 15 महिला तीर्थयात्री शामिल हैं।
- विविधता में एकता: आंध्र प्रदेश से लेकर उत्तराखंड तक, देश के 13 राज्यों के श्रद्धालु इस दल का हिस्सा हैं।
- टनकपुर मार्ग से संचालन: लगातार दूसरे वर्ष टनकपुर मार्ग से इस पवित्र यात्रा का संचालन किया जा रहा है।
- पारंपरिक लोक नृत्य से स्वागत: शनिवार को टनकपुर पहुंचे यात्रियों का उत्तराखंड के पारंपरिक छोलिया नृत्य और पुष्पवर्षा के साथ स्वागत हुआ।
टनकपुर (चंपावत)। उत्तराखंड में पवित्र कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 का रविवार (5 जुलाई) को औपचारिक शुभारंभ हो गया। चंपावत जिले के टनकपुर स्थित पर्यटक आवास गृह से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यात्रा के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर अगले पड़ाव के लिए रवाना किया। इस पहले दल में देश के विभिन्न हिस्सों से आए कुल 49 श्रद्धालु शामिल हैं। प्रस्थान से पूर्व मुख्यमंत्री धामी ने सभी तीर्थयात्रियों को भोलेनाथ की पट्टिका और रुद्राक्ष की माला भेंट कर उनकी सुरक्षित, सफल और मंगलमय यात्रा की कामना की।
विविधता से भरा है पहला दल, 21 से 68 साल के यात्री शामिल
शारदा पर्यटक आवास गृह के प्रबंधक मनोज कुमार के अनुसार, इस पहले जत्थे में 34 पुरुष और 15 महिला श्रद्धालु शामिल हैं। यह दल भारत की सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय एकता का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है, क्योंकि इसमें आंध्र प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के श्रद्धालु शामिल हैं।
इस दल में राजस्थान के 68 वर्षीय पुरुषोत्तम खंडेलवाल सबसे वरिष्ठ यात्री हैं, जबकि गुजरात के 21 वर्षीय हरिकृष्णा सबसे युवा श्रद्धालु हैं। यात्रियों के साथ तमिलनाडु के डॉ. अरुण कुमार बतौर चिकित्सक के रूप में यात्रा कर रहे हैं। ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयघोष के साथ यह पहला दल आगे बढ़ा।
क्या है यात्रा का मार्ग?
टनकपुर से रवाना होने के बाद यह दल पिथौरागढ़ पहुंचेगा। वहां से धारचूला और गूंजी होते हुए तीर्थयात्री लिपुलेख दर्रे से होकर चीन (तिब्बत) स्थित कैलाश मानसरोवर के लिए प्रवेश करेंगे, जहां उनकी यह ऐतिहासिक धार्मिक यात्रा पूरी होगी।
‘यह केवल यात्रा नहीं, सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है’: सीएम धामी
रवानगी के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “यह केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह हमारी आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रीय समरसता का प्रतीक है। भगवान शिव की असीम कृपा से ही श्रद्धालुओं को इस पवित्र यात्रा का सौभाग्य मिलता है।”
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा सीमांत क्षेत्रों के विकास और समृद्धि का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम है। यह देश को सीमांत गांवों की समृद्ध संस्कृति और स्थानीय जीवन से जोड़ती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे यात्रा के दौरान स्थानीय हस्तशिल्प और उत्पादों को खरीदकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में अपना सहयोग दें।
उत्तराखंड की लोक संस्कृति से रूबरू हुए यात्री
यह दल शनिवार (4 जुलाई) की शाम को ही टनकपुर पहुंच गया था। देवभूमि की परंपरा के अनुरूप छोलिया नृत्य, पुष्पवर्षा और फूल-मालाओं के साथ यात्रियों का भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद एक सांस्कृतिक संध्या का भी आयोजन हुआ, जिसमें उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और लोक कलाओं की मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं।
सातवीं बार इस यात्रा पर जा रहे श्रद्धालु अनिल कुमार जैन ने यात्रा की तैयारियों की सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखंड सरकार ने यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए उत्कृष्ट प्रबंध किए हैं। उल्लेखनीय है कि लगातार दूसरे साल इस यात्रा का सफल संचालन टनकपुर मार्ग से किया जा रहा है।
