सतयुग में शशोका नाम का नरभक्षी था जो आते जाते राहगीरो को मारकर खा जाता था। एक दिन जब वो शिकार पर निकला तब उसे एक कुटिआ में साधना करते हुए साधु मिले , उनको शांत देख कर शशोका ने पूछा की आप मुझसे डरे क्यों नहीं सभी लोग मुझसे डरते है, साधु बोले की मुझे क्या डरना अगर भगवन ने मुझे तुम्हारा भोजन चुना है तो मैं इसके लिए तैयार हु, ये सुनकर शशोका की आँखे खुल जाती है और वो साधु से माफ़ी माँगते हुए रास्ता पूछता है जिससे सभी पाप और दुख दूर हो सके उसके भाव को पहचानते हुए साधु उसे वरदान देते है की अगले जन्म में तुम अशोक नाम का पौधा बनोगे जो रावण नाम के राक्षस के बगीचे में लगा होगा और जब एक दिन हनुमान जी आकर माता सीता से मिलेंगे और तुम्हारी शाखाओ के ऊपर बैठकर उनको श्री राम का संदेश सुनाएंगे तो उसे सुन कर माता सीता के दुःख के साथ साथ तुम्हारे भी दुःख और पाप दूर हो जायेंगे यही वजह है की आज कलयुग में लोग दुख दूर करने के लिए घर में अशोक का पेड़ लगाते है।
मास्टर प्लान के तहत तैयार हो रहा चार मंजिला सब-जिला अस्पताल, 31 अगस्त तक काम…
गांव लौटे प्रवासियों के अनुभवों और स्वरोजगार के प्रयासों को साझा करने पर जोर सितंबर…
देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित 'मुख्य सेवक सदन' में मुख्यमंत्री उद्यमशाला…
टिहरी गढ़वाल :उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने, स्थानीय उत्पादों को…
नैनीताल उत्तराखंड उच्च न्यायालय को नैनीताल से हल्द्वानी के बेल बाबा क्षेत्र में स्थानांतरित करने…
रुड़की :उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाने वाली कोसी नदी बेसिन पर आने…