देहरादून: भारत सरकार और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने देश की आपदा प्रबंधन प्रणाली को अधिक विश्वसनीय और त्रुटिहीन बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण और सुरक्षात्मक कदम उठाया है। हाल ही में मई 2026 में लॉन्च की गई आधुनिक मोबाइल-आधारित ‘सेल ब्रॉडकास्ट सर्विस’ (CBS) को कुछ तकनीकी और प्रक्रियागत सुधारों के लिए अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। विशेषज्ञों और अधिकारियों का मानना है कि इस समीक्षा प्रक्रिया से आने वाले समय में जनता को और अधिक सटीक, समयबद्ध और बिना किसी तकनीकी गड़बड़ी के आपातकालीन अलर्ट मिल सकेंगे।
यह फैसला एक जिम्मेदार और एहतियाती कदम के रूप में देखा जा रहा है। हाल ही में इस प्रणाली के व्यावहारिक क्रियान्वयन के दौरान कुछ राज्यों (जैसे हरियाणा और उत्तर प्रदेश) में रात के समय जारी हुए परीक्षण अलर्ट और उनसे जुड़े तकनीकी पहलुओं की व्यापक समीक्षा करने की आवश्यकता महसूस की गई। इसके बाद, एनडीएमए ने 12 जून को एक एडवाइजरी जारी कर इस सेवा को अगली सूचना तक अस्थायी रूप से रोक दिया।
आपदा के समय चेतावनी संदेशों की विश्वसनीयता सबसे महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में मानसून के मुख्य दौर से ठीक पहले इस स्वदेशी तकनीक के मापदंडों और प्रोटोकॉल की समीक्षा करना एक दूरदर्शी कदम है। इससे न केवल तकनीकी खामियों को पूरी तरह दूर किया जा सकेगा, बल्कि नागरिकों तक गलत समय पर या अनावश्यक रूप से पहुंचने वाले संदेशों को भी रोका जा सकेगा।
सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (C-DOT) द्वारा विकसित और एनडीएमए तथा दूरसंचार विभाग (DoT) के सहयोग से तैयार किया गया यह सिस्टम भारत की आपदा चेतावनी प्रणाली को “रिएक्टिव से प्रोएक्टिव” (प्रतिक्रियात्मक से आगे बढ़कर सक्रिय दृष्टिकोण) बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसकी प्रमुख विशेषताएं इसे बेहद खास बनाती हैं:
उत्तराखंड जैसे भौगोलिक रूप से संवेदनशील राज्य के लिए, जहां प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु चारधाम यात्रा पर आते हैं, यह तकनीक भविष्य में एक बड़ा सुरक्षा कवच बनेगी। हालांकि मानसून के शुरू होने से पहले इस पर अस्थायी रोक लगी है, लेकिन राज्य का आपदा प्रबंधन तंत्र पहले से ही पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है।
उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन के अनुसार, प्रशासन भूस्खलन संभावित क्षेत्रों, नदी-नालों के जलस्तर और मौसम की पल-पल की जानकारी के लिए अन्य स्थापित प्रणालियों (जैसे सामान्य एसएमएस, सचेत मोबाइल ऐप और क्षेत्रीय चेतावनी प्रणालियों) का पूरा उपयोग कर रहा है। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर निगरानी को भी मजबूत किया गया है।
यह अस्थायी रोक केवल तकनीकी सुधार की एक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य भविष्य में आपदा चेतावनी व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और सशक्त बनाना है। जैसे ही संबंधित सरकारी एजेंसियां इसकी समीक्षा और परीक्षण पूरा कर लेंगी, देश को एक ऐसा परिष्कृत और त्रुटिहीन सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम मिलेगा जो विषम परिस्थितियों में भी मानव जीवन की सुरक्षा को पूरी जिम्मेदारी से सुनिश्चित करने में सक्षम होगा।
(हरिद्वार): सोमवती अमावस्या के पावन स्नान पर्व के अवसर पर धर्मनगरी हरिद्वार में श्रद्धा और आस्था…
(देहरादून): देवभूमि उत्तराखंड अपनी पवित्र चारधाम यात्रा और धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ अब पर्यावरण अनुकूल पर्यटन…
उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित भारत के सीमांत गांव माणा और बदरीनाथ धाम के…
बदरीनाथ: बदरीनाथ क्षेत्र के रक्षक माने जाने वाले भगवान घंटाकर्ण मंदिर के कपाट सोमवार को…
नैनीताल: उत्तराखंड के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल कैंची धाम के स्थापना दिवस पर देश-विदेश से बाबा…
खटीमा (उधम सिंह नगर): उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को अपने गृह…