Web Stories

सेठ को बैठे-बैठे हुए श्री जगन्नाथ जी के दर्शन!

एक सेठ के यहाँ एक व्यक्ति काम करता था, जो परम भगवान भक्त था। सेठ उस पर अटूट विश्वास करता और हर महत्वपूर्ण कार्य उसी से करवाता।
भक्त का मन सदा भगवान के भजन, कीर्तन, सत्संग और स्मरण में रमा रहता था।

एक दिन उस भक्त ने सेठ से श्री जगन्नाथ धाम की यात्रा हेतु कुछ दिनों की छुट्टी मांगी। सेठ ने सहर्ष छुट्टी दी और कहा,
“भाई! मैं तो व्यापार में व्यस्त रहता हूँ, कभी तीर्थ यात्रा का लाभ नहीं ले पाया। तुम जा ही रहे हो तो यह 100 रुपए मेरी ओर से प्रभु के चरणों में अर्पित कर देना।”

भक्त सेठ से सौ रुपए लेकर यात्रा पर निकला। कई दिनों की पैदल यात्रा के बाद वह श्री जगन्नाथ पुरी पहुँचा।
मंदिर की ओर जाते समय उसने देखा – रास्ते में हरि नाम संकीर्तन हो रहा है। संत, भक्त, वैष्णवजन बड़े प्रेम से भगवान का नाम गा रहे हैं।
चारों ओर “हरि बोल! हरि बोल!” की ध्वनि गूंज रही थी, और सभी की आँखों से प्रेमाश्रु बह रहे थे।
भक्त भी आनंदपूर्वक उसी संकीर्तन में सम्मिलित हो गया।

कुछ समय बाद उसने देखा कि लम्बे समय से संकीर्तन करते हुए संतजनों के ओष्ठ सूख गए हैं और वे भूख से पीड़ित प्रतीत हो रहे हैं।
उसके मन में विचार आया,
“क्यों न सेठ के सौ रुपए से इन संतों को भोजन कराऊँ? प्रभु सबसे संत सेवा से ही प्रसन्न होते हैं।”

उसने तुरंत सौ रुपए में से 98 रुपए खर्च कर संतों के लिए स्वादिष्ट भोजन की व्यवस्था कर दी।
सभी संत प्रसन्न होकर भगवान का गुणगान करते रहे।
भक्त के पास दो रुपए शेष बचे।
उसने सोचा,
“चलो, इन दो रुपयों को प्रभु श्री जगन्नाथ के चरणों में अर्पित कर दूंगा। सेठ से कह दूंगा कि पैसे चढ़ा दिए। झूठ भी नहीं होगा और काम भी पूरा हो जाएगा।”

इसके बाद भक्त ने श्री जगन्नाथ मंदिर में प्रवेश कर प्रभु के दर्शनों का लाभ लिया।
प्रेमपूर्वक प्रभु को निहारते हुए उसने सेठ के नाम से दो रुपए चढ़ा दिए और आनंदपूर्वक वापस लौट आया।

उधर, उसी रात सेठ को स्वप्न में श्री जगन्नाथ जी के दर्शन हुए।
प्रभु मुस्कुराते हुए बोले,
“सेठ! तुम्हारे 98 रुपए मुझे मिल गए हैं।”
यह कहकर प्रभु अंतर्ध्यान हो गए।
सेठ जागा तो चकित रह गया —
“मेरा नौकर तो बड़ा ईमानदार है, फिर उसने दो रुपए का क्या किया?”

कई दिनों बाद जब भक्त लौटकर आया, सेठ ने प्रेमपूर्वक पूछा,
“मेरे सौ रुपए भगवान को चढ़ा दिए थे ना?”
भक्त ने सिर झुकाकर उत्तर दिया,
“हाँ सेठ जी, चढ़ा दिए।”

सेठ ने धीरे से पूछा,
“लेकिन 98 रुपए कैसे चढ़ाए? दो रुपए का क्या किया?”

तब भक्त ने पूरी घटना का वर्णन कर दिया —
कैसे उसने संतजनों को भोजन कराया और शेष दो रुपए प्रभु के चरणों में अर्पित किए।

सेठ यह सुनकर गद्गद हो उठा।
उसने भक्त के चरणों में सिर झुका दिया और कहा,
“आप धन्य हैं! आपकी सेवा भावना से मुझे भी बैठे-बैठे प्रभु श्री जगन्नाथ जी के दर्शन हो गए।”

Tv10 India

Recent Posts

उत्तराखंड में कल भारी बारिश की चेतावनी: देहरादून, चमोली और बागेश्वर में ऑरेंज अलर्ट; 7 जिलों में यलो अलर्ट जारी

देहरादून (उत्तराखंड) :मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने बृहस्पतिवार (6 अगस्त) को उत्तराखंड के अधिकांश हिस्सों…

5 hours ago

उत्तराखंड में सरकारी और वन भूमि से अतिक्रमण हटाने पर हाईकोर्ट सख्त: मुख्य सचिव को 2 हफ्ते में जवाब देने के निर्देश, हलफनामा भी होगा दाखिल

नैनीताल (उत्तराखंड) :उत्तराखंड में वन भूमि, राष्ट्रीय राजमार्गों, राजकीय राजमार्गों और राजस्व भूमि पर हुए…

5 hours ago

धराली आपदा की पहली बरसी: गीता पाठ के साथ 101 पौधे रोपकर दी श्रद्धांजलि; 115 घर हुए थे तबाह

उत्तरकाशी (उत्तराखंड) :उत्तरकाशी के धराली में 5 अगस्त 2025 को आई विनाशकारी आपदा को आज…

6 hours ago

हरिद्वार कांवड़ यात्रा: गंगा के तेज बहाव में देवदूत बनी SDRF, 22 शिवभक्तों की बचाई जान; बिछड़े परिवारों का सहारा बनी पुलिस

हरिद्वार (उत्तराखंड)हरिद्वार में चल रहे कांवड़ मेले में शिवभक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। अब…

8 hours ago

उत्तराखंड में 10 अगस्त तक भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने राज्य के लिए 10 अगस्त तक का मौसम पूर्वानुमान जारी…

1 day ago