भारत में ऐसे कई प्राचीन शिव मंदिर हैं, जिनसे जुड़ी अद्भुत मान्यताएं और रहस्य प्रचलित हैं। इन्हीं में से एक है गुजरात का स्तंभेश्वर महादेव मंदिर, जो अपनी अनूठी विशेषता के कारण श्रद्धालुओं के बीच खासा प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि यह मंदिर दिन में दो बार लुप्त हो जाता है और फिर प्रकट होता है!
स्तंभेश्वर महादेव मंदिर गुजरात की राजधानी गांधीनगर से लगभग 175 किलोमीटर दूर जंबूसर के कवि कंबोई गांव में स्थित है। यह मंदिर अरब सागर के तट पर स्थित है, और इसकी सबसे रहस्यमयी बात यह है कि समुद्र की लहरें दिन में दो बार मंदिर को पूरी तरह से ढक लेती हैं, जिससे यह शिवलिंग ओझल हो जाता है। जब पानी वापस लौटता है, तो मंदिर दोबारा दिखाई देने लगता है।
इस मंदिर का उल्लेख शिव पुराण में मिलता है। कथा के अनुसार, ताड़कासुर नामक एक राक्षस ने घोर तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया। शिव ने उसे वरदान दिया कि केवल उनके पुत्र ही उसकी मृत्यु का कारण बन सकते हैं, लेकिन उनकी आयु मात्र 6 दिन होनी चाहिए। वरदान पाकर ताड़कासुर ने देवताओं और ऋषियों पर अत्याचार बढ़ा दिए।
तब, श्वेत पर्वत कुंड से भगवान कार्तिकेय का जन्म हुआ। मात्र 6 दिन की आयु में उन्होंने ताड़कासुर का वध कर दिया। किंतु, भक्त की मृत्यु से भगवान शिव दुखी हो गए। इसे देखकर कार्तिकेय को ग्लानि हुई और उन्होंने प्रायश्चित करने के लिए उसी स्थान पर एक शिवलिंग की स्थापना की, जो कालांतर में स्तंभेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
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