नैनीताल/रुद्रपुर: उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले के किच्छा में स्थित बहुचर्चित ‘कुलसुम खान फार्म’ पर जबरन कब्जे और सुरक्षा से जुड़ा विवाद अब उत्तराखंड उच्च न्यायालय (नैनीताल हाईकोर्ट) पहुंच गया है। इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए हाईकोर्ट ने संबंधित उपजिलाधिकारी (एसडीएम) और थाना प्रभारी (एसएचओ) को आगामी 6 जुलाई 2026 को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए हैं।
न्यायाधीश न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रशासन को सिविल कोर्ट के 11 जून 2026 के आदेश का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने का आदेश दिया है। यह याचिका पीड़ित पक्ष द्वारा फार्महाउस में मौजूद महिलाओं, बच्चों और बेजुबान पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की गुहार लगाने के बाद दायर की गई थी।
मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता सिकंदर आलम खान ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर बताया कि ऊधमसिंह नगर जनपद के किच्छा क्षेत्र के पिपलिया मोड़ पर स्थित ‘कुलसुम खान फार्म’ उनकी बुआ स्वर्गीय कुलसुम खान का है। कुलसुम खान ने अपनी मृत्यु (18 दिसंबर 2025) से पूर्व, वर्ष 2024 में एक पंजीकृत वसीयत के जरिए यह संपत्ति सायरा और उनके चचेरे भाई सिकंदर आलम खान के नाम कर दी थी। सायरा, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की जेठानी हैं।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि कुलसुम खान के निधन की खबर मिलते ही दूसरा पक्ष (बुआ की बहन नसरीन सांगा) कुछ लोगों के साथ प्रशासन की कथित मिलीभगत से फार्म पर जबरन कब्जा करने पहुंच गया। आरोप के मुताबिक, वहां रह रहे पुरुषों को जबरन बाहर निकाल दिया गया, जबकि महिलाओं, बच्चों और बेजुबानों को बाहर जाने से रोक दिया गया।
याचिका में कहा गया है कि उनके पास पंजीकृत मूल वसीयत मौजूद है और इस मामले में उन्हें 11 जून 2026 को सिविल कोर्ट से स्थगन आदेश (स्टे) भी प्राप्त हुआ था। प्रशासन और पुलिस को कोर्ट के आदेश की प्रति दिखाए जाने के बावजूद, नियमों की अवहेलना करते हुए दूसरे पक्ष (नसरीन सांगा) को फार्म पर कब्जा दिला दिया गया। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से न्याय की गुहार लगाते हुए आरोप लगाया कि पिछले तीन दिनों से उनके परिजनों को अंदर बंद रखा गया है और उनके साथ अभद्रता की जा रही है।
पिपलिया में 10 एकड़ जमीन पर फैले इस बेशकीमती (लगभग 30 करोड़ रुपये मूल्य) फार्महाउस को लेकर पिछले दो दिनों से भारी राजनीतिक गहमागहमी बनी हुई है। हंगामे और धरने की आशंका को देखते हुए पुलिस और प्रांतीय रक्षक दल (पीएसी) ने फार्महाउस के आसपास सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी कर दी है। मौके पर पांच दरोगा समेत करीब 30 जवान तैनात किए गए हैं। वर्तमान में स्थानीय प्रशासन मामले के कोर्ट में होने का हवाला देते हुए कुछ भी स्पष्ट कहने से बच रहा है।
यह विवाद अब पूरी तरह राजनीतिक रूप ले चुका है। एक ओर जहां सायरा वाड्रा वसीयत के आधार पर अपना दावा पेश कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर नसरीन सांगा भूमि के दस्तावेजों को अपने दावे का आधार बता रही हैं। प्रियंका गांधी वाड्रा का नाम जुड़ने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस मुद्दे को लेकर सीधे गांधी-वाड्रा परिवार पर निशाना साधा है। दूसरी तरफ, कांग्रेस के स्थानीय विधायक तिलकराज बेहड़ ने मामले में एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाते हुए प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और जरूरत पड़ने पर आत्मदाह तक की चेतावनी दी है।
फिलहाल, सभी की निगाहें 6 जुलाई को हाईकोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई और अधिकारियों की पेशी पर टिकी हुई हैं।
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