उत्तरकाशी. भारी बारिश और भूस्खलन के कारण उत्तराखंड में मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। यमुनोरी राष्ट्रीय राजमार्ग जगह-जगह मलबा आने से बंद है, वहीं स्याना चट्टी में कुपड़ा खड्ड से आए भारी मलबे के कारण यमुना नदी का प्रवाह एक बार फिर रुक गया है, जिससे वहां दोबारा खतरनाक कृत्रिम झील बनने लगी है। इस झील के कारण स्याना चट्टी बाजार, पुल और सड़क पानी में डूब गए हैं, जिससे इलाके में दहशत का माहौल है।
हाईवे कई स्थानों पर बंद
भारी बारिश के चलते यमुनोत्री हाईवे कुथनौर, सिलाई बैंड, ओजरी डाबरकोट, जंगल चट्टी, और नारद चट्टी समेत कई स्थानों पर मलबा-बोल्डर आने और भू-धंसाव के कारण यातायात के लिए पूरी तरह से बंद हो गया है। मार्ग खोलने के लिए सीमा सड़क संगठन (BRO) की टीमें जुटी हुई हैं, लेकिन लगातार हो रही बारिश से काम में बाधा आ रही है।
स्याना चट्टी में बढ़ा संकट
स्याना चट्टी में बुधवार को कुपड़ा खड्ड से भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर यमुना नदी में आ गए, जिससे नदी का प्रवाह थम गया और कृत्रिम झील बन गई। देखते ही देखते झील का जलस्तर इतना बढ़ गया कि पानी स्याना चट्टी के होटलों, सरकारी स्कूल और घरों में घुस गया। दो मंजिला इमारतें तक पानी में डूब गईं और यमुनोत्री हाईवे पर बना पुल भी जलमग्न हो गया। इससे गीठ पट्टी के 12 गांवों के लगभग 8 हजार लोगों का संपर्क मुख्यालय से कट गया है।
हालांकि, शुक्रवार रात को नदी का प्रवाह तेज होने से झील का मुहाना कुछ समय के लिए खुल गया था, लेकिन अब मलबे के दोबारा जमा होने से फिर से झील बनने लगी है। नदी का बहाव पुल से महज कुछ ही फीट नीचे है और कई होटलों के निचले तल में अभी भी पानी भरा हुआ है।
प्रशासन की लापरवाही से नुकसान का आरोप
स्थानीय निवासियों में इस घटना को लेकर भारी रोष है। स्याना चट्टी निवासी जयपाल सिंह रावत, नवदीप और पटमी देवी ने आरोप लगाया कि यह नुकसान प्रशासन की लापरवाही के कारण हुआ है। उनका कहना है कि जून माह में जब पहली बार यहां झील बनी थी, तभी उन्होंने प्रशासन से मलबे को हटाने और नदी को चैनलाइज करने की मांग की थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का कहना है कि अगर यह घटना रात में हुई होती तो एक बड़ी जनहानि हो सकती थी, लेकिन दिन का समय होने के कारण लोग सतर्क हो गए और समय रहते ऊंचे स्थानों पर जाकर अपनी जान बचाई।
स्थालियों के अनुसार, कुपड़ा खड्ड से लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण खतरा अभी टला नहीं है।प्रशासन ने एनडीआरएफ, एसडीआरएफ की टीमों को मौके पर तैनात किया है और करीब 150 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।फिलहाल झील के जलस्तर में कुछ कमी आई है, लेकिन खतरा बना हुआ है।
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