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रक्षाबंधन 2024: इस दिन खुलेंगे बंशी नारायण मंदिर के कपाट

बंशी नारायण मंदिर, उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह मंदिर सालभर बंद रहता है, जिससे भक्त इसकी नियमित पूजा नहीं कर पाते। हालांकि, मंदिर के कपाट एक विशेष दिन पर केवल 12 घंटे के लिए खोले जाते हैं। इस खास दिन पर मंदिर के खुलते ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है, जो यहां पूजा अर्चना करते हैं और भगवान बंशी नारायण का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

चमोली: चमोली जिले की उर्गम घाटी में स्थित भगवान वंशीनारायण का मंदिर सालभर में केवल एक दिन, रक्षाबंधन के दिन, ही खुलता है और सूर्यास्त होते ही इसे सालभर के लिए बंद कर दिया जाता है। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और आसपास के ग्रामीण रक्षाबंधन का त्योहार भगवान को रक्षा सूत्र बांधने के बाद ही मनाते हैं।

गोपेश्वर, जो चमोली का जिला मुख्यालय है, से 12 किलोमीटर की पैदल यात्रा के बाद बांशा गांव में स्थित श्री वंशीनारायण मंदिर के दर्शन होते हैं। यह मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है और यहां महिलाएं रक्षाबंधन के दिन भगवान विष्णु को रक्षा सूत्र बांधने के बाद ही रक्षाबंधन का पर्व मनाती हैं।

स्कंदपुराण, पद्मपुराण और श्रीमद् भागवत कथा के अनुसार, भगवान नारायण ने यहां वामन अवतार लिया था और राजा बलि से तीन पग में तीनों लोकों को दक्षिणा में मांगकर उन्हें पाताल लोक भेज दिया था, जिससे राजा बलि का अहंकार चूर हो गया था।

वंशीनारायण मंदिर की लोक मान्यता और विशेषताएँ: चमोली जिले की उर्गम घाटी में स्थित वंशीनारायण मंदिर की लोक मान्यता के अनुसार, इस मंदिर की स्थापना छठी सदी में राजा यशोधवल के समय की गई थी। मान्यता है कि देव ऋषि नारद 364 दिन भगवान विष्णु की आराधना करते हैं, और केवल एक दिन के लिए कहीं चले जाते हैं। उसी दिन मानव पूजा का अधिकार प्राप्त करते हैं, जिससे रक्षाबंधन के दिन मंदिर खुलता है और भक्तों को पूजा का अवसर मिलता है।

वंशीनारायण मंदिर की फुलवारी में विभिन्न प्रकार के फूल खिलते हैं, जिससे श्रावण पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु का विशेष श्रृंगार किया जाता है। मंदिर के पुजारी क्षत्रिय जाति के होते हैं और मंदिर की प्रतिमा 10 फीट ऊंची कत्यूरी शैली में बनाई गई है। गर्भगृह वर्गाकार है, जहाँ भगवान चतुर्भुज रूप में विराजमान हैं। यहाँ भगवान नारायण और भगवान शिव दोनों के दर्शन होते हैं। इसके साथ ही, वंशीनारायण मंदिर में भगवान गणेश और वन देवियों की मूर्तियां भी स्थापित हैं।

बंशी नारायण मंदिर के कपाट कब खुलते हैं?

चमोली में स्थित बंशी नारायण मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए केवल रक्षाबंधन के दिन खोले जाते हैं। इस दिन, जब तक सूर्य की रोशनी रहती है, मंदिर खुला रहता है। सूर्यास्त होते ही मंदिर के कपाट फिर से बंद कर दिए जाते हैं। सुबह से ही दूर-दराज से श्रद्धालु मंदिर के दर्शन के लिए यहां पहुंचने लगते हैं और बेसब्री से कपाट खुलने का इंतजार करते हैं।

बंशी नारायण मंदिर से जुड़ी कथा

यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। मान्यता है कि भगवान विष्णु अपने वामन अवतार से मुक्ति पाने के बाद सबसे पहले इसी स्थान पर आए थे। तब देव ऋषि नारद ने यहां भगवान नारायण की पूजा अर्चना की थी। इसलिए, मान्यता है कि केवल एक दिन के लिए, भगवान के दर्शन के लिए मंदिर के कपाट खोले जाते हैं।

रक्षाबंधन पर ही क्यों खुलता है मंदिर?

इस मंदिर के रक्षाबंधन के दिन खुलने की कथा राजा बलि और भगवान विष्णु से जुड़ी हुई है। कथा के अनुसार, राजा बलि ने भगवान विष्णु से उनका द्वारपाल बनने का आग्रह किया था, जिसे भगवान ने स्वीकार कर लिया और वे राजा बलि के साथ पाताल चले गए। कई दिनों तक जब माता लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को कहीं नहीं पाया, तो उन्होंने नारद जी के सुझाव पर श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन राजा बलि को रक्षा सूत्र बांधकर भगवान विष्णु को मुक्त करने का आग्रह किया। इसके बाद, राजा बलि ने भगवान विष्णु को माता लक्ष्मी के साथ इसी स्थान पर मिलवाया।

माना जाता है कि बाद में इस जगह पर पांडवों ने मंदिर का निर्माण कराया। रक्षाबंधन के दिन यहां आने वाली महिलाएं भगवान बंशी नारायण को राखी बांधती हैं। इस मंदिर के आसपास दुर्लभ प्रजाति के फूल और पेड़ भी देखने को मिलते हैं, और यहां का दृश्य मनमोहक होता है।

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