नई दिल्ली: एक बार हैं किसी नगर में एक राजा ने एक मंदिर बनवाया जिसमें श्रीकृष्ण की एक मूर्ति भी रखवाई। लेकिन उसकी कभी पूजा नहीं की। पूजा करने के लिए मंदिर में एक पुजारी को रखा गया। पुजारी नियमित कन्हैयाजी को नहलाता और बड़ी ही श्रद्धाभाव से उनकी पूजा-अर्चना करता। राजा भी रोज कान्हाजी के लिए एक फूलों की माला भेज देता था और जब वह दर्शन करने आता तो पुजारी उस माला को उतारकर राजा को पहना देता। ऐसा करते-करते पुजारी की भी उम्र बीत चुकी थी। एक दिन किसी वजह से राजा नहीं आ सका तो उसने एक सेवक के हाथ मंदिर में माला पंहुचा दी और कहलवाया दिया कि आज वह मंदिर नहीं आएगा इसलिए पुजारी उसका इंतज़ार ना करें। इतना कहकर सेवक चला गया। पुजारी ने हमेशा की तरह कन्हैयाजी को माला पहना दी। लेकिन जब शाम हुई तो पुजारी यह सोचने लगा, माला उतारकर किसे पहनाई जाए? उसने सोचा क्यों न ये माला आज मैं ही पहन लूं। वैसे भी मेरी उम्र हो चली हैं। जीवन का क्या पता कब ख़त्म हो जाएं। इतना सोचकर पुजारी ने माला उतारकर अपने गले में डाल ली लेकिन इतने में ही सेवक आ गया और उसने बताया की राजा की सवारी मंदिर में पहुंचने वाली है…..
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