Web Stories

हनुमान की 10% शक्ति भी नहीं सह पाया बाली!

रामायण के पन्नों में किष्किंधा के पराक्रमी राजा बाली का वर्णन एक ऐसे योद्धा के रूप में मिलता है, जिसके बल का कोई सानी नहीं था। वह वानर राज सुग्रीव का बड़ा भाई और देवराज इंद्र का धर्मपुत्र था

रामायण के अनुसार बाली को उसके धर्मपिता इंद्र से एक स्वर्ण हार प्राप्त हुआ था। इसी हार की शक्ति के कारण बाली लगभग अजेय था। उसने कई युद्ध लड़े और सभी में वह जीता। इस स्वर्ण हार को ब्रह्मा ने मंत्रयुक्त करके यह वरदान दिया था कि इसको पहनकर बाली जब भी रणभूमि में अपने शत्रु का सामना करेगा तो उसके शत्रु की आधी शक्ति क्षीण हो जाएगी और यह आधी शक्ति बाली को प्राप्त हो जाएगी। यही बाली की शक्ति का राज था।

एक दिन बाली अपने बल के नशे में जंगल में पेड़-पौधों को उखाड़ने लगा और जोर-जोर से गरजने लगा। उसी जंगल में हनुमान जी प्रभु राम का ध्यान कर रहे थे। बाली के शोर से उनकी साधना भंग हो गई।

हनुमान जी ने शांत भाव से बाली को ऐसा न करने की सलाह दी। लेकिन बाली, अहंकार में चूर होकर, हनुमान जी को ही युद्ध के लिए ललकार बैठा। हनुमान जी ने पहले तो उसे अनदेखा किया, किंतु जब बाली ने प्रभु राम का नाम लेकर चुनौती दी, तब महावीर हनुमान उसकी ललकार स्वीकार करने को बाध्य हो युद्ध से पहले ब्रह्मा जी हनुमान जी के समक्ष प्रकट हुए और बोले –
“हे रुद्रावतार! आप अनंत शक्ति के स्वामी हैं। यदि आप अपनी पूरी शक्ति के साथ युद्ध करेंगे, तो बाली का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। अतः आप अपनी शक्ति का केवल दसवां हिस्सा लेकर युद्ध में जाएँ और शेष शक्ति प्रभु राम के पास सुरक्षित रख दें।”

हनुमान जी ने ब्रह्मा जी की आज्ञा का पालन किया। निर्धारित समय पर हनुमान जी युद्धभूमि में पहुँचे। जैसे ही वे रामनाम का उच्चारण करते हुए बाली के सामने खड़े हुए, वरदान के अनुसार उनकी शक्ति का आधा हिस्सा बाली के शरीर में प्रवेश करने लगा।

शुरू में बाली अत्यंत प्रसन्न हुआ—उसे लगा कि वह और भी बलशाली हो गया है। लेकिन कुछ ही क्षणों बाद वह समझ गया कि यह शक्ति तो उसकी सीमा से कहीं अधिक है। उसका शरीर उस शक्ति के बोझ को सहन नहीं कर पा रहा था। ऐसा प्रतीत होने लगा कि उसका शरीर भीतर से ही फट जाएगा।

तभी ब्रह्मा जी प्रकट हुए और बोले—
“हे बाली! यह तो हनुमान जी की मात्र दसवें हिस्से की शक्ति है। सोचो, यदि वे सम्पूर्ण बल लेकर आते तो तुम्हारा क्या होता? तुमने घमंड में आकर जिस शक्ति को चुनौती दी थी, वही शक्ति आज तुम्हें स्वयं अपनी सीमा का ज्ञान करा रही है।” यह सुनकर बाली का अहंकार चूर-चूर हो गया। वह समझ गया कि हनुमान जी कोई साधारण वानर नहीं, बल्कि रुद्रावतार हैं—जिनकी शक्ति का मापन करना असंभव है।

Tv10 India

Recent Posts

उत्तराखंड में कल भारी बारिश की चेतावनी: देहरादून, चमोली और बागेश्वर में ऑरेंज अलर्ट; 7 जिलों में यलो अलर्ट जारी

देहरादून (उत्तराखंड) :मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने बृहस्पतिवार (6 अगस्त) को उत्तराखंड के अधिकांश हिस्सों…

17 hours ago

उत्तराखंड में सरकारी और वन भूमि से अतिक्रमण हटाने पर हाईकोर्ट सख्त: मुख्य सचिव को 2 हफ्ते में जवाब देने के निर्देश, हलफनामा भी होगा दाखिल

नैनीताल (उत्तराखंड) :उत्तराखंड में वन भूमि, राष्ट्रीय राजमार्गों, राजकीय राजमार्गों और राजस्व भूमि पर हुए…

17 hours ago

धराली आपदा की पहली बरसी: गीता पाठ के साथ 101 पौधे रोपकर दी श्रद्धांजलि; 115 घर हुए थे तबाह

उत्तरकाशी (उत्तराखंड) :उत्तरकाशी के धराली में 5 अगस्त 2025 को आई विनाशकारी आपदा को आज…

18 hours ago

हरिद्वार कांवड़ यात्रा: गंगा के तेज बहाव में देवदूत बनी SDRF, 22 शिवभक्तों की बचाई जान; बिछड़े परिवारों का सहारा बनी पुलिस

हरिद्वार (उत्तराखंड)हरिद्वार में चल रहे कांवड़ मेले में शिवभक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। अब…

20 hours ago

उत्तराखंड में 10 अगस्त तक भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने राज्य के लिए 10 अगस्त तक का मौसम पूर्वानुमान जारी…

2 days ago